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स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 का सच : झिरी में नहीं लगा प्लांट, अब कबाड़ी वालों से सहयोग लेगा निगम

हकीकत यह है कि अपनी असफलता को ही देखकर विभाग ने अब नये पहल के तहत कबाड़ी वालों से सहयोग लेना शुरू किया है.

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Ranchi : स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 प्रतियोगिता को लेकर नगर विकास विभाग ने अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए प्रदेश के 41 नगर निकायों से डोर टू डोर कचरा उठाने के साथ सॉलिड वेस्ट पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी दिशा में विभाग ने शहर में कार्यरत कबाड़ी वालों की मदद से एमटीएस स्तर पर ही वेस्ट सेग्रिगेशन करना भी शुरू कर दिया है. हालांकि हकीकत यह है कि अपनी असफलता को ही देखकर विभाग ने अब नये पहल के तहत कबाड़ी वालों से सहयोग लेना शुरू किया है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि जिस सॉलिड वेस्ट के निष्पादन पर अब सरकार जोर दे रही है, उसके लिए झिरी में ही कुछ साल पहले प्लांट लगाया जाना था.

जो आज तक नहीं लग सका है. इसी तरह पहले भी कई वार्डों से सूखा और गीला कचरा नहीं उठाने की शिकायतें पार्षदों के मार्फत मिलती रही हैं. बीते जुलाई माह में शहरी विकास मंत्रालय ने अपने एक सर्वेक्षण में झारखंड को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर काफी दयनीय स्थिति बतायी थी. चूंकि मोदी सरकार के कार्यकाल का यह अंतिम वर्ष है और मार्च-अप्रैल माह में चुनाव भी होना है. ऐसे में जरूरी है कि चुनाव से पहले तक सर्वेक्षण का रिजल्ट दे दिया जाए. अब सवाल यह है कि इतने कम समय में सॉलिड वेस्ट का निष्पादन सरकार के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

सिटीजन फीडबैक सहित ऑब्जर्वेशन पर होगा जोर 

स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए इस बार शहर के लिए मंत्रालय ने चार कैटेगरी तैयार की है. यह चारों कैटेगरी 5000 मार्क्स पर आधारित है. इसमें सिटीजन फीडबैक में 25 प्रतिशत (1250 मार्क्स), डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में 25 प्रतिशत (1250 मार्क्स), सर्विस लेवल प्रोसेस में 25 प्रतिशत (1250 मार्क्स), सर्टीफिकेशन में 25 प्रतिशत (1250 मार्क्स) निर्धारित है. मालूम हो कि 2018 का यह सर्वेक्षण 4000 मार्क्स पर तीन कैटेगरी में बांटा गया था. इसमें सिटीजन फीडबैक में 35 प्रतिशत, डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में 30 प्रतिशत और सर्विस लेवल प्रोसेस में 35 प्रतिशत शामिल किया गया था.

सर्वेक्षण 2019 में नये पैमानों पर उतरना है चुनौती

स्वच्छता में बेहतर स्थिति पा चुके झारखंड को अभी भी कई नए पैमानों पर खरा उतरना एक विशेष चुनौती है. स्वच्छता सर्वे 2019 को लेकर मंत्रालय ने कई बिंदु तय किये हैं. इसमें सबसे प्रमुख गीला-सूखा कचरा को अलग-अलग तरीके से निष्पादन करना अनिवार्य है. इसके साथ ही सॉलिड वेस्ट कचरे का सही तरीके से निष्पादन, सार्वजनिक व्यवसायिक और आवासीय क्षेत्रों की सफाई, वैज्ञानिक तरीके से कचरे की प्रोसेसिंग, नागरिकों की समस्या को एप, हेल्पलाइन या अन्य माध्यम से समाधान करने और फीडबैक के लिए सिस्टम का उपयोग, डंप साइट में ही पुराने कचड़े की प्रोसेसिंग और निपटान करना शामिल है.

सॉलिड वेस्ट निष्पादन में नहीं हो सका है सुधार

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में की गयी पहल की बात करें  तो इस दिशा में शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि राज्य की स्थिति क्या है. रिपोर्ट में स्टेट वाइज ऑकड़े जारी करते हुए कहा गया था कि राज्य का नंबर नीचे से चौथे स्थान पर है. वहीं छतीसगढ़ का इसमें पहला स्थान था. इसी तरह सितंबर माह में झिरी में प्रस्तावित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट निर्माण कार्य नहीं होने पर नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह ने भी एस्सेल इंफ्रा कंपनी पर नाराजगी जतायी थी. इस संदर्भ में उन्होंने नगर आयुक्त को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने की बात कही थी. हालांकि रिपोर्ट दी गयी या नहीं इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल पायी है. वहीं उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने अब जनवरी माह तक इस दिशा में कपनी को कार्य करने का आदेश दिया है. ऐसा नहीं होने पर कंपनी को टर्मिनेट करने की बात भी कही गयी है.

विभाग ने की विशेष तैयारी, वेस्ट सेग्रिगेशन पर होगा जोर

हालांकि निगम अभी भी यही दावा करता है कि सर्वेक्षण 2019 में राज्य की स्थिति 2018 के तुलना में बेहतर होगी. झिरी में प्लांट नहीं लगने के बाद सॉलिड वेस्ट से रैंकिंग में नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़े, इसके लिए अब निगम स्तर पर ही वेस्ट सेग्रिगेशन पर विशेष जोर दिया है. ताकि गीला-सूखा कचरा का अलग-अलग तरीके से निष्पादन किया जा सके. शहर में काम कर रहे कबाड़ीवालों से इस बार सहयोग लेने की पहल की गयी है. तीन एमटीएस (हरमू, नागाबाबा, मोरहाबादी) से सूखा कचरा लेने के लिए जे.डी. सोढ़ी नाम के कबाड़ी वाले को काम दिया गया है. हरमू और नागाबाबा एमटीएस में 30 नवंबर से और मोरहाबादी एमटीएस में 1 दिसंबर से यह काम शुरू हुआ है. इसकी मदद से इन एमटीएसों से रिसाइकिल मैटेरियल जैसे कि प्लास्टिक, बोतल, ग्लास, पेपर्स, आयरन, एल्यूमिनियम को अलग-अलग कर इसके निष्पादन का प्रयास किया जाएगा.

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