न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पीएमओ को क्लीन चिट : चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के विरोध के बाद चुनाव आयोग फिर विचार करने को तैयार 

चुनाव आयोग चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के आग्रह पर आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर नीति आयोग और पीएमओ को दी गयी  क्लीनचिट पर पुनर्विचार करेगा.

75

NewDelhi : चुनाव आयोग चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के आग्रह पर आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर नीति आयोग और पीएमओ को दी गयी क्लीनचिट पर पुनर्विचार करेगा. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों को लेकर गोंडिया, वर्धा और लातूर के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए पीएमओ द्वारा नीति आयोग के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने आयोग से शिकायत की थी. पिछले हफ्ते चुनाव आयोग ने इस मामले का निपटारा करते हुए नीति आयोग और पीएमओ को क्लीनचिट दे दी थी.

12 मई को एक संवाददाता सम्मेलन में उप चुनाव आयुक्त संदीप सक्सेना ने पत्रकारों को सूचित किया था कि चुनाव आयोग ने पाया है कि इस मामले में की गयी शिकायत में कोई दम नहीं है.उप चुनाव आयुक्त संदीप सक्सेना ने कहा कि प्रधानमंत्री को उस प्रावधान से छूट दी गयी है जो मंत्रियों को प्रचार के साथ आधिकारिक यात्राएं करने से रोकते हैं. इस छूट का प्रावधान अक्टूबर 2014 में किया गया था.

इसे भी पढ़ें- सरकार बनाने का भरोसा, चन्द्रबाबू नायडू राहुल गांधी और शरद पवार से  फिर मिले

अशोक लवासा ने कहा था, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत स्पष्टीकरण पेश करें

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहा था कि इस मामले में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत स्पष्टीकरण पेश करें कि क्या नीति आयोग ने गोंडिया, वर्धा और लातूर के कलेक्टरों से जानकारी मांगी थी और क्या ये जानकारी प्रधानमंत्री की चुनावी रैलियों के लिए इस्तेमाल की जानी थी. हालांकि लवासा के अनुरोध को दरकिनार करते हुए चुनाव आयोग ने नीति आयोग को क्लीनचिट दे दी गयी थी. इसके बाद लवासा ने आपत्ति जताई कि पूरा तथ्य प्राप्त किये बगैर कैसे ये फैसला ले लिया गया.

इसे भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल में फिर हिंसा, बीजेपी ने लगाया टीएमसी पर फर्जी वोटिंग और मारपीट का आरोप

WH MART 1

गुरुवार को अमिताभ कांत को दूसरा पत्र लिखा

इसके बाद चुनाव आयोग ने बीते गुरुवार को अमिताभ कांत को एक दूसरा पत्र लिखा और कहा कि वे स्पष्टीकरण पेश करें कि क्या नीति आयोग ने गोंडिया, वर्धा और लातूर के कलेक्टरों से जानकारी मांगी थी और क्या ये जानकारी प्रधानमंत्री की चुनावी रैलियों के लिए इस्तेमाल की जानी थी. हालांकि कांत को जवाब देने की कोई समयसीमा नहीं दी गयी है.

नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय पर सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए  एक मई को कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी. कांग्रेस ने अपनी शिकायत में 10 अप्रैल की स्क्रॉल डॉट इन की एक रिपोर्ट हवाला दिया था जिसमें कहा गया था कि मोदी की रैली से पहले नीति आयोग के अधिकारियों ने महाराष्ट्र के तीन जिलों के जिला अधिकारियों को पत्र लिखा था.

वहीं स्क्रॉल डॉट इन को मिले एक अन्य ईमेल से पता चला था कि नीति आयोग के एक अधिकारी ने 8 अप्रैल को सभी केंद्र शासित प्रदेशों के जिला अधिकारियों को पत्र लिखा था. कांग्रेस ने कहा था कि नीति आयोग का यह काम चुनाव आयोग के उन दिशानिर्देशों का उल्लंघन है जिसमें उसने चुनाव के दौरान सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगाई थी.

इसे भी पढ़ें-  गुफा में 17 घंटे के ध्यान-साधना के बाद मोदी ने फिर केदारनाथ मंदिर में की पूजा अर्चना

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like