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45 मिनट के अंदर कूड़ा उठाने का दावा फेल, एस्सेल इंफ्रा ने नहीं बनाया अब तक मोबाइल एप

मार्च 2016 में मीडिया में एप डेवलप करने की आयी थी खबर

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काम लेते वक्त कंपनी ने कहा था, एप से होगी सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग

Ranchi :  शहर के सफाई की व्यवस्था सुधारने का दावा रांची नगर निगम और कंपनी एस्सल इंफ़्रा हर बार करती रही है. लेकिन वास्तव में हकीकत यह है कि ना तो कंपनी और न ही निगम सफाई कार्य में पूरी तरह से सफल दिख रही है. हालांकि दुर्गापूजा से लेकर छठ पर्व में निगम ने जिस तत्परता से शहर की सफाई का जिम्मा लिया, उससे आज निगम कर्मियों की प्रशंसा भी हो रही है. वहीं कंपनी जिस वार्डों में सफाई कार्य को देख रही है, वहां की स्थिति कमोवेश ठीक नहीं है.

राजधानी में सफाई व्यवस्था का कार्य जब कंपनी ने ली थी, तो कहा था कि इस कार्य के लिए कंपनी हाइ टेक टेक्नोलॉजी का सहारा लेगी. इसके लिए कंपनी ने एक एप डेवलप कर इसमें शिकायत दर्ज कराने पर 45 मिनट में सफाई करने का दावा किया था. लेकिन अपने इस दावे में वह पूरी तरह से असफल होते दिख रही है कंपनी. इसी तरह रांची नगर निगम ने भी मार्च 2016 में एक प्रस्ताव बना कर कहा था कि शहर में गंदगी फैलाने वालों पर निगम 100 रुपये से 5000 रुपये तक जुर्माना वसूलेगा. लेकिन निगम भी अपने इस कार्य मे पूरी तरह से असफल ही रहा है. यही कारण है कि लोग आज भी शहर में गंदगी फैला रहे है. उन्हें निगम का कोई डर नहीं रह गया है.

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एप बनाने का कंपनी ने किया था दावा

बड़ा तालाब, वार्ड 21 स्तिथ भुईया टोली मे फैला कूड़ा

एस्सल इंफ़्रा ने जब राजधानी में सफाई का काम लिया था, तो मार्च 2016 को मीडिया मे एक खबर छपी थी, जिसमें कहा गया था कि शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कंपनी हाईटेक टेक्नोलॉजी का सहारा लेगी. इसके तहत कंपनी ने एप डेवलप बनाने का दावा किया था. इससे कंपनी को सफाई करने की मॉनटरिंग करने में सहुलियत होने की बात कही गयी थी. कंपनी का कहना था कि इस एप के बनने से लोग कचरा वाले वाहन नहीं आने पर इसमें अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं. कंपनी का दावा था कि एक बार शिकायत दर्ज हो जाने के बाद उसे 45 मिनट के अंदर दूर कर दिया जाएगा,  चाहे इसके लिए एक ही घर से क्यों न कूड़ा उठाना पड़े. इसके अलावा एप पर लोग शहर की सड़कों पर बहते गंदे पानी या नाली जाम की शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

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नहीं बनाया एप, हटाने की उठती रही है मांग

वहीं कंपनी में कार्यरत एक कर्मचारी ने भी इसका दावा किया है कि कंपनी अपने इस दावे में पूरी तरह से असफल साबित रही है. कंपनी ने न तो अभी तक ऐसा कोई एप बनाया है, न ही सफाई कार्य के लिए कोई उन्नत टेकॉनोलोजी का सहारा ली है. इस कारण आज अपने वार्ड में कार्यरत कंपनी सफाई कार्य को पूरी तरह से दुरुस्त नहीं कर पायी है. यही कारण है कि हाल के दिनों में कई पार्षद निगम बोर्ड की बैठक मे कंपनी को हटाने की मांग करते रहे है.

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जब संसाधन ही नहीं, तो कंपनी क्या बनाएगी एप : अरूण झा

इस मामले पर वार्ड 26 के पार्षद अरूण झा ने न्यूज़ विंग संवाददाता से बात की. उनका कहना था कि सफाई कार्य के अपने हर दावे पर कंपनी पूरी तरह से असफल रही है. उन्होंने कहा कि आप एप बनाने की बात करते है, लेकिन हकीकत यह है कि कंपनी जिस 33 वार्डों में सफाई का काम देख रही हैं वहां तो वह डोर टू डोर कूड़ा तक नहीं उठा पा रही है. ऐसे में एप बनाने का दावा कर कंपनी ने पूरी तरह प्रशासन और जनता को गुमराह करने का काम किया है.

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