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2020 तक ग्रामीण इलाकों में खुशहाली लाने का दावा हो रहा फिसड्डी

 रिटायर्ड IAS टी नंदकुमार की अध्यक्षता में बनी थी रिपोर्ट

2,010

Ranchi: सत्ता में आने के बाद राज्य की रघुवर सरकार ने कई दावे और वादे किये थे. सरकार ने 2018-19 के बजट में झारखंड विजन एंड एक्शन प्लान-2021 भी प्रस्तुत किया था. इस रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को सुधारने का दावा किया गया था. लेकिन एक वर्ष बाद भी दावे धरातल पर नहीं उतरते दिख रहे हैं. राज्य के पूर्व आइएएस अफसर टी नंदकुमार की अध्यक्षता में राज्य के विकास को लेकर यह रिपोर्ट सदन में रखी गयी थी. इसमें कहा गया था कि 2020 तक ग्रामीण इलाकों में खुशहाली लाते हुए जीवन की गुणवत्ता का सुधार किया जायेगा. इसको लेकर कई घोषणाएं भी की गयी थीं, जिसे अमली जामा पहनाने का ताबड़तोड़ प्रचार भी किया गया.

सरकार ने कहा था कि 2020 तक झारखंड को देशभर के टॉप-10 राज्यों की श्रेणी में शामिल किया जायेगा. फिलहाल देश के निचले पायदानवाले राज्यों में झारखंड का नाम है. सरकार की तरफ से झारखंड ऑपूरचुनिटीज फॉर हार्नेशिंग रूरल ग्रोथ (जोहार) भी बनाया गया है.

18 लाख ग्रामीण परिवारों में से 50 फीसदी की लाइफ स्टाइल तीन वर्ष में बदलने का था दावा

सरकार ने कहा था कि देशभर में सबसे अधिक झारखंड की ग्रामीण आबादी गरीब और मूलभुत सुविधाओं से वंचित है. सरकार ने राज्य के 18 लाख ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कई कार्यक्रम की घोषणा भी की थी. 2021 तक 18 लाख ग्रामीण परिवारों में से 50 फीसदी तक की बेहतरी के लिए 22 घंटे तक बिजली देने, बैंकिंग की सुविधाएं सभी गांवों तक पहुंचाने की बातें कही गयी थीं.

इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के 80 प्रतिशत घरों को पक्का बनाने, सभी घरों में शौचालय की सुविधा बहाल करने की भी घोषणाएं की गयी थीं. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 हजार रुपये वाला शौचालय ग्रामीण क्षेत्रों में बनवाया गया है. महिला स्वंय सहायता समूहों को आजीविका मिशन कार्यक्रम से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का भी दावा किया गया था.

नहीं खुले 16 सौ ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की शाखाएं

सरकार की तरफ से 2020 तक ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की 16 सौ शाखाएं खोलने की घोषणा की गयी थी. यह आंकड़ा अब तक 100 भी पार नहीं कर पाया है. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में लगातार ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं में पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही है. वैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी बैंकों की शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने के लिए उतने आतूर नहीं दिखते हैं.

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