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CJI यौन उत्पीड़न केस : दो जजों ने जांच कमेटी से जताई आपत्ति, कहा- पीड़िता के बिना सुनवाई ठीक नहीं

New Delhi : सीजेआई रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के केस ने अब नया मोड़ ले लिया है. इस केस की सुनवाई जिन जजों के द्वारा की जा रही थी उनके बीच मतभेद उभर आए हैं. क्योंकि उनका कहना है कि पीड़ित महिला के बिना सुनवाई करना ठीक नहीं है. इसी को लेकर जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन ने इनहाउस जांच कमेटी से आपत्ति भी जताई है.

बिना महिला के सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट की छवि पर पड़ेगा असर

जिन दो जजों ने आपत्ति जताई है उन्होंने जिस्टिस जस्टिस एस.ए बोबड़े, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी वाली जांच कमेटी से मलाकात की. उन्होंने कहा कि बगैर महिला के सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट की छवि पर असर पड़ेगा.

इसलिए पीड़ित महिला की मांग के अनुसार उसे उसके वकील के जरिए अपनी बात कहने की इजाजत दी जाए या फिर किसी न्यायविद् को अमाइकस क्यूरी बनाया जाए. गौरतलब है कि दोनों जजों ने यह आपत्ति पीड़ित महिला के रुख के बाद सामने आयी है.

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क्या थी महिला की मांग

30 अप्रैल को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मी ने मामले में जांच कर रही आंतरिक समिति के माहौल को ‘बहुत डरावना’ बताया था.

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साथ ही अपने वकील की मौजूदगी की अनुमति नहीं दिये जाने समेत अनेक आपत्तियां जताते हुए आगे से समिति के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया. उसने कहा कि उसे अपनी सुरक्षा की भी फिक्र है क्योंकि कार्यवाही से लौटते वक्त दो से चार लोगों ने उसका पीछा किया.

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि समिति ने बिना वीडियो या ऑडियो रिकार्डिंग के कार्यवाही संचालित की. समिति में शीर्ष अदालत की दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल हैं. महिला ने कहा था कि उसे 26 से 29 अप्रैल को दर्ज किये गये उसके बयान की प्रति भी नहीं दी गयी.

महिला ने दावा किया था कि समिति ने उससे बार-बार पूछा कि उन्होंने यौन उत्पीड़न की यह शिकायत इतनी देरी से क्यों की. उसने कहा कि मुझे समिति का माहौल बहुत डरावना लगा और मैं सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के सामने होने और उनके सवालों की वजह से बहुत घबराई रही, जहां मेरे वकील मौजूद नहीं थे.

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महिला की मांग को जजों ने जांच कमेटी के सामने उठाया

महिला शिकायतकर्ता की इसी मांग को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने जांच कमेटी के सामने उठाया है. साथ ही उन्होंने कहा कि महिला की इस मांग पर ध्यान दिया जाए. क्योंकि बगैर महिला के मौजूदगी सुनवाई करना उचित नहीं है.

शिकायतकर्ता की इसी मांग को अब सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने इनहाउस जांच कमेटी के सामने उठाया है और कहा है कि महिला की मांग पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि उनकी गैर-मौजूदगी में सुनवाई करना उचित नहीं है.

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