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ऑर्किड अस्पताल को बचाने में अड़े सिविल सर्जन, दो जांच के बाद भी कह रहे तीसरी जांच हो

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Pravin/Gaurav

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Ranchi : ऑर्किड अस्पताल में गलत इलाज के कारण मेहरुन निशात की मौत हो गयी थी. रिर्पोट में इस बात का खुलासा भी हो चुका है. जांच रिपोर्ट एक नहीं बल्कि दो बार आ चुका है. पीएमओ के निर्देश के बाद दोबारा जांच हुई थी. रिपोर्ट में साफ किया गया था कि गलत इलाज और लापरवाही के कारण मरीज की जान गयी थी. रिर्पोट में साक्ष्य भी संलग्न हैं. झारखंड सरकार के स्वास्थय विभाग ने रिपोर्ट के आधार पर रांची जिला सिविल सर्जन विजय बहादुर प्रसाद को कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया था. कार्रवाई नहीं होने के कारण विभाग ने सिविल सर्जन को छह महीने में पांच बार रिमाइंडर भेजा. पर सिविल सर्जन ऑर्किड को बचाने पर अड़े हैं.

दो बार जांच हो जाने के बाद भी तीसरी बार जांच की मांग कर रहे हैं. जिससे गलत इलाज से जान  लेने और विभाग के निर्देश के बाद भी ऑर्किड अस्पताल पर कार्रवाई नहीं हो सकी है. क्लीनिकल स्टेबलिसमेंट एक्ट के कार्रवाई के तहत ऑर्किड अस्पताल के रजिस्ट्रेशन पर विचार किया जाना है.

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सीएस को करनी थी कार्रवाई, अस्पताल से मांग दिया स्पष्टीकरण

सिविल सर्जन को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया था. साथ ही कार्रवाई करने के बाद कार्रवाई प्रतिवेदन सौंपने का कहा गया था. पर सिविल सर्जन ने जो प्रतिवेदन विभाग को सौंपा है, उसमें सिविज सर्जन के द्वारा ऑर्किड अस्पताल से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी. सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है ऑर्किड पर कार्रवाई करने के निर्देश थे और स्पष्टीकरण नहीं मांगी गयी थी.

सिविल सर्जन ने तर्क देते हुए कहा कि कार्रवाई से पहले किसी भी संस्थान से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, इसलिए स्पष्टीकरणा मांगा है. सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दूसरी रिपोर्ट जिसमें साक्ष्य मौजूद है, उसका हवाला नहीं देकर पहली रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन को ऑर्किड ने स्पष्टीकरण सौंपा था.

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सचिव बोले हमने स्पष्टीकरण नहीं बल्कि कार्रवाई करने को कहा था

विभाग के सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि हमने महरुन निशात मामले में सिविल सर्जन को कार्रवाई के आदेश दिये थे. हमने उनसे स्पष्टीकरण मांगा ही नहीं था. सिविल सर्जन ही सभी अस्पतालों को लाईसेंस प्रोवाइड करते हैं और लाईसेंस पर विचार करने का अधिकार उनका ही है. विभाग की ओर से हमने बार-बार सिविल सर्जन को रिमाइंडर भेजा है, पर वो कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

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छह महीने में पांच बार CS को अस्पताल पर कार्रवाई करने का रिमाइंडर

जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन रांची विजय बहादुर प्रसाद को ऑर्किड अस्पताल पर क्लीनिकल स्टेबलिसमेंट एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश दिये गये थे. अब तक छह महीने में पांच बार सिविल सर्जन को विभाग की ओर से कार्रवाई के लिए रिमाइंडर भेजा जा चुका है, पर सिविल सर्जन कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. 1 जनवरी 2019, 25 फरवरी 2019, 19 मार्च 2019, 29 मार्च 2019 और तीन मई को भी रिमाइंडर भेजा गया.

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3.7 क्रिटिनिन रहने के बाद भी डायलिसिस कर दिया गया 

जांच में पाया गया कि मरीज को मलेरिया था ही नहीं और मलेरिया की दवा चला दी गयी थी. 3.7 क्रिटिनिन रहने के बाद भी डायलिसिस कर दिया गया. इसके अलावा जांच रिपोर्ट में ये बात सामने आयी थी कि मरीज दवा खा सकता था पर न्यूट्रिफ्लेक्स लिपिड का इनफ्यूसन भी दिया गया. यह तभी दिया जाता है जब मरीज मुंह से कुछ नहीं ले सकता.

इसके अलावा एंटी बायोटिक मोक्सिफ का इंजेक्शन और टिरिका का टैबलेट भी दिया गया. जबकि ओरली मौक्सिीफ्लोसिन लिया जा सकता था. रिर्पोट में साफ है कि जो दवा दी गयी, वो देना उचित नहीं था. सीएसएफ के स्टेराईल रहने पर भी बार-बार एंटी बायोटिक बदल दिया जाता रहा. ब्लड सीएसएफ और यूरीन स्टेराईल रहने के बाद भी मृत्यु का कारण सेप्टीक शॉक को बताया गया जो गलत है.

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