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BIG NEWS : जमशेदपुर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एके लाल 30 अक्तूृबर के बाद हो सकते हैं बर्खास्त

सरकारी सेवा में रहते बिहार की झंझारपुर विधानसभा सीट से लड़ा था चुनाव, विभागीय जांच में सेवा बर्खास्तगी की अनुशंसा, दूसरा शो-कॉज जारी

Rajnish Tiwari

Jamshedpur : सरकारी पद पर रहते हुए विधानसभा चुनाव लड़ने के मामले में फंसे पूर्वी सिंहभूम के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एके लाल की नौकरी आगामी 30 अक्तूबर के बाद जा सकती है. विभागीय जांच में उनके खिलाफ लगाये गये आरोप प्रमाणित हुए हैं. जांच संचालन पदाधिकारी की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया है. अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ लाल को दूसरा शो-कॉज जारी कर प्रमाणित आरोपों के संबंध में 30 अक्तूबर तक अपना जवाब देने को कहा गया है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ प्रस्तावित दंड अधिरोपित किया जाये. विभाग के  संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज  के दस्तखत से यह नोटिस जारी किया गया है.

2005 में बिहार में लड़ा था चुनाव, अबतक दबा रहा मामला

विदित हो कि  बिहार के वैशाली जिले में जेरांग स्थित प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में चिकित्सा पदाधिकारी‘ पर रहते हुए डॉ एके लाल ने वर्ष 2005 में बिहार की झंझारपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. सरकार को शिकायत मिलने पर वर्ष  2019 से इस पर जांच चल रही थी.  कुछ महीने पहले उन्हें पूर्वी सिंहभूम का प्रभारी सिविल सर्जन बना दिया गया. विगत 7 सितंबर को विधानसभा में विधायक सरयू राय के सवाल के जवाब में सरकार ने कहा था कि डॉ अरविंद कुमार लाल की सेवा समाप्ति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. वर्ष 2019 से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. उसी विभागीय कार्रवाई के तहत विभागीय जांच की समीक्षा के बाद डॉ लाल की सेवा समाप्ति का दंड प्रक्रियाधीन है.

आरोपों और वरीयता को दरकिनार कर बना दिया प्रभारी सीएस

सरकारी नियमानुसार अगर किसी सरकारी कर्मचारी या पदाधिकारी के खिलाफ कोई गंभीर शिकायत पर विभागीय कायर्वाही प्रक्रियाधीन होती है, तो उसे बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती. डॉ लाल के विरुद्ध वर्ष 2019 से ही इस मामले में जांच चल रही है, पर बावजूद कार्रवाई करने के उन्हें पूर्वी सिंहभूम का प्रभारी सिविल सर्जन बना दिया गया.  सात सितंबर को सरयू राय द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया था कि उन्हें प्रोन्नति नहीं दी गई, बस सिविल सर्जन का प्रभार दिया गया. वैसे भी डॉ महेश्वर प्रसाद के सिविल सर्जन पद से सेवानिवृत्त होने के समय डॉ साहिर पॉल एसीएमओ के पद पर कार्यरत थे, ऐसे में नियमानुसार डॉ महेश्वर के बाद डॉ साहिर पॉल को सिविल सर्जन का प्रभार मिलना था, पर ऊंची पैठ होने के कारण डॉ एके लाल को सिविल सर्जन का प्रभार मिल गया.

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