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रिनपास में दो साल से खराब पड़ी है सिटी स्कैन मशीन, रिम्स जाकर मरीज कराते हैं टेस्ट

करोड़ों की लागत से रिनपास में सीटी स्कैन सेंटर का हुआ था शुभारंभ

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Chandan Choudhary

Ranchi : राजधानी में स्थित रिनपास अपने गौरवपूर्ण इतिहास के लिए देशभर में विख्यात है. रांची के कांके स्थित रिनपास हॉस्पिटल में इलाज के लिये मानसिक रोगी देश के कोने-कोने से आते हैं. कई मरीज यहां विदेशों भी इलाज के लिये आते हैं. हर दिन लगभग 300 की संख्या में मरीज इलाज के लिये इस हॉस्पिटल में आते हैं. लेकिन विडंबना ये है कि हॉस्पिटल में सीटी स्कैन मशीन बीते दो सालों से खराब पड़ा है.

विभागीय अनदेखी एवं रिनपास प्रबंधन की उदासीनता का खामियाजा यहां के मरीजों को भुगतना पड़ा रहा है. हालात ये हैं कि रिनपास में भर्ती मरीजों को रिम्स भेजकर सीटी स्कैन कराया जाता है. जबकि ओपीडी के मरीज निजी क्लिनीक में 2-5 हजार रुपए खर्च करके अपना सीटी स्कैन कराते हैं. वहीं इस बारे में निदेशक का कहना है कि कोई मरीज शिकायत लेकर आता ही नहीं तो कार्रवाई क्या करें. साल 2008 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही ने रिनपास परिसर में करोड़ों की लागत से बने सीटी स्कैन सेंटर का शुभारंभ किया था. लेकिन कुछ ही दिनों बाद मशीन खराब हो गई. बीच में एक दो बार इसे बनवाया भी गया. लेकिन अब हालात ये हैं कि इन दिनों सीटी स्कैन सेंटर में ताला लटका है.

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रिम्स भेज देते हैं सीटी स्कैन कराने : निदेशक


इस विषय पर न्यूज विंग संवाददाता ने रिनपास के निदेशक डॉ सुभाष सोरेने से जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि यहां ज्यादा सीटी स्कैन की जरुरत नहीं पड़ती. साथ ही कहा कि यदि जरुरत पड़ भी जाये तो उन्हें रिम्स भेजकर करा लिया जाता है. जब उनसे मशीन बनवाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कंपनी से स्टिमिट मांगा गया था. लेकिन कंपनी ने जरुरत से ज्यादा का स्टिमिट दिखा दिया, जिससे मशीन बन नहीं पा रहा है. साथ ही डॉ सोरेन ने कहा कि जितना खर्च मशीन बनवाने के लिए किया जायेगा, उससे कम राशि में ही रिम्स को देकर अपने मरीज का सीटी स्कैन करा सकते हैं.

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एक लाख 20 हजार रुपए का बताया गया खर्च

वहीं सूत्रों से जानकारी मिली है कि जिस कंपनी ने पहले मशीन इंस्टॉल किया था, अब उसी कंपनी ने मशीन की मरम्मती के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए का स्टिमिट दिया है. इसके अप्रवुल के लिए फाइल आगे बढ़ा तो दिया गया है. लेकिन फिलहाल उस फाइल को दबाकर रखा गया है और इसकी जानकारी किसी को नहीं है. वहीं इस बारे में रिनपास के ही कर्मचारी ने बताया कि मरीजों के सीटी स्कैन के लिए सीआईपी से भी संपर्क किया गया है.

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रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है रिनपास में

दुभार्ग्य तो यह भी है कि मानसिक रोगियों के इलाज के लिए देशभर में प्रसिद्ध इस हॉस्पिटल में एक रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है. मरीजों का रिपोर्ट खुद डॉक्टर ही लिखते और देखते हैं. वहीं के एक कर्मचारी ने बताया कि जो डॉक्टर किसी मरीज की जांच लिखते हैं, वह खुद ही मरीज का रिपोर्ट भी देखते हैं. साथ ही कहा कि हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट की बेहद आवश्यकता है. इसके लिए पत्र भी लिखा गया है, लेकिन सरकार की नींद कब खुलेगी, यह कहा नहीं जा सकता.

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