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#EconomicSlowdown : CII ने कहा- मंदी ने उद्योगों को किया बीमार, मरने से बचाने वाली सरकार चाहिए 

Jamshedpur : कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII) ने कहा है कि जमशेदपुर में उद्योगों का बुरा हाल तो है ही, पूरे राज्य में औद्यौगिक इकाइयां बीमार हो चुकी हैं.

जमशेदपुर में आयोजित एमएसएमइ कॉन्क्लेव के दौरान सीआइआइ ने गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि नयी सरकार के लिए उद्योग को बचाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.

कन्फेडरेशन ने यह भी कहा कि राज्य की औद्योगिक नीति में तकनीकी अडचने भी हैं जिस पर बेहद गंभीरता से ध्यान देना होगा नहीं तो ये बीमार कंपनियां बहुत जल्द मर जायेंगी या उन राज्यों में पलायन कर जायेंगी जो इन्हें संजीवनी देगा.

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औद्यौगिक संकट के समय चुनाव एक मौका

सीआइआइ के अनुसार इस संकट की घंड़ी में राज्य के उद्यमियों के लिए चुनाव एक मौका है. उद्योग जगत उन्हीं को प्रथमिकता देगा जो उनको संजीदगी से मंदी के गहरे संकट से उबारने क लिए पहल करेगा.

सीआईआई ने दावा किया की जून 2019 के बाद से स्थिति और विकराल होती चली गयी है क्योंकि उससे पहले मंदी से उबरने के संकेत थे लेकिन अब वो भी दिखाई नहीं देते.

उद्योग जगत  हैरत में है कि सरकार या सरकार के प्रतिनीधि को जानकारी होने के बाद भी न तो उनसे चर्चा हुई न ही कोई आश्वासन मिला. लिहाजा निराशा और नाराजगी हर तरफ है.

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नहीं मिला RBI का पैसा

CII  ने यह भी कहा है कि करीब पांच महीने पहले रिजर्व बैंक की तरफ से राहत पैकज के रूप में एक लाख करोड़ से ज्यादा की राशि उद्योग जगत के लिए केंद्र सरकार को दी गयी है लेकिन एक रुपया भी यहां के उद्योगों को नहीं मिल सका है.

बजट एलोकेशन की धीमी रफ्तार के चलते उद्योगों को मिलने वाला ऑक्सीजन भी उनसे दूर है.

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बैंकों की मनमानी पर लगे अंकुश

लाख बैठकों और हिदायतों के बाद भी बैंकों का दोहरा व्यवहार लगातार जारी है. बैंक उद्यमियों को सहुलियत देने के बजाय परेशान ज्यादा करते हैं. इस पर अंकुश लगाने में आज तक किसी भी सरकार को कामयाबी नहीं मिली है.

सरकार का सिंगल विंडो सिस्टम बैंकों में दिखाई नहीं देता. उद्यमी आज भी बैंकों में टेबलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं

टाटा के अलावा कोई बड़ा उद्योग नहीं

झारखंड अलग होने के बाद कई सरकारें आयीं लेकिन जमशेदपुर में टाटा छोड़ और कोई बड़ा उद्योग नहीं लग सका जबकि रेलवे और डिफेंस जैसे सेक्टर में उद्योग की संभावना को लेकर रिपोर्ट सरकार को कई बार सौंपी गयी हैं.

मंदी के असर को समझाते हुए CII  के ऑफिसर और हाइको इंडस्ट्रीज के निदेशक तापस साहू का कहना है कि मंदी का असर आज शहर के सभी उद्योगों पर है. वो इसीलिए कि सभी टाटा मोटर्स से जुडी हैं.

औद्योगिक क्षेत्र की करीब 1400 इकाइयां टाटा मोटर्स पर निर्भर हैं. अगर यहां टाटा के अलावा और दूसरी बड़ी कंपनियां होतीं तो मंदी इतनी व्यापक नहीं होती.

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