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CID जांच से सामने आया सांसद निशिकांत के फर्जी MBA सर्टिफिकेट का सच, डीयू ने कहा- सही है RTI

Ranchi:  सीएमओ को मिली एक शिकायत की जांच के दौरान सीआइडी को पता चला है कि गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे की एमबीए की डिग्री कथित तौर पर फर्जी है. जांच के दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी ने आरटीआइ के तहत मिले उस जवाब को सही करार दिया है, जिसके आधार पर झामुमो ने पिछले दिनों यह दावा किया था कि सांसद निशिकांत दुबे का एमबीए सर्टिफिकेट फर्जी है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सीआइडी को लिखित जानकारी दी है कि उसने आरटीआइ के तहत यह जवाब दिया था कि वर्ष 1993 में उनके यहां से किसी निशिकांत दुबे नामक व्यक्ति ने एमबीए नहीं किया है.

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जानकारी के मुताबिक देवघर निवासी विष्णुकांत झा ने देवघर सदर थाने में एक आवेदन दिया था. आवेदन में उन्होंने गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे पर आरोप लगाया था कि सांसद की एमबीए की डिग्री फर्जी है. आवेदन के साथ श्री झा ने आरटीआइ के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से दिये गये उस जवाब की कॉपी भी लगाई थी. जिसमें लिखा हुआ थाः वर्ष 1993 में निशिकांत दुबे नाम का कोई भी स्टूडेंट उनके एफएमएस (Faculty Of Management Studies) विभाग से ना ही पासआउट हुआ है और ना ही दाखिला लिया था. इसके बाद जेएमएम ने भी निशिकांत पर इसी तरह के आरोप लगाये और चुनाव आयोग को जांच के लिए पत्र लिखा.

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जेएमएम के आरोपों के जवाब में सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर एक एफआइआर की कॉपी शेयर की थी. एफआइआर बिजेंद्र कुमार पांडे की तरफ से गोरखपुर के खोराबार जनपद में 29 जुलाई 2017 को करायी गयी थी. एफआइआर में आरोप लगाया है कि किसी ने बीजेंद्र कुमार पांडेय के नाम का गलत इस्तेमाल कर दिल्ली यूनिवर्सिटी से सांसद निशिकांत दुबे के बारे आरटीआइ की जानकारी मांगी है. इसके बाद इन सारी बातों की शिकायत झारखंड के सीएमओ से भी की गयी.

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सीएमओ ने सीआइडी को दिया जांच का जिम्मा

सीएमओ को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच का जिम्मा सीआइडी को दिया गया. सीआइडी ने तीन अफसरों की एक टीम बनायी और उसे दिल्ली रवाना किय़ा. टीम ने दिल्ली पहुंच कर दिल्ली यूनिवर्सिटी के एफएमएस कार्यालय में मामले से संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की. मुलाकात के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से टीम को एक पत्र जारी किया गया. पत्र झारखंड सरकार के पुलिस अधिकारी राजेश कुमार (Inspector Of Police) के नाम है.

पत्र में साफ तौर से लिखा हुआ है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की एफएमएस डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1993 में निशिकांत दुबे नाम का कोई व्यक्ति ना ही पासआउट हुआ है और ना ही किसी का दाखिला हुआ है. साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी ने यह भी लिखा कि इस बात की जानकारी आरटीआइ के माध्यम से 05.01.2016 को पहले भी दी जा चुकी है.

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