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CID ने धनबाद के पूर्व SSP कौशल किशोर से की पूछताछ, ECL कर्मी को गांजा तस्करी के फर्जी केस में भेजा था जेल

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Ranchi: धनबाद में ईसीएल कर्मी को गांजा तस्कर बताकर जेल भेजने के मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है. इस मामले में सीआइडी ने पश्चिम बंगाल के कोयला तस्कर राजीव राय सहित चार लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है.

बहुचर्चित निरसा गांजा बरामदगी केस में सीआइडी के एडीजी अनिल पाल्टा ने धनबाद के पूर्व एसएसपी किशोर काैशल से पूछताछ की है. एडीजी अनिल पाल्टा ने काैशल के सामने बिठाकर करीब एक घंटे तक कई सवाल किए. पूर्व एसएसपी कौशल किशोर ने जो बयान दिया है. उसकी सत्यता की जांच की जाएगी.

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कई लोगों से की गयी पूछताछ

निरसा में गांजा तस्करी में निर्दोष को फंसाये जाने के मामले में सीआइडी के एडीजी अनिल पाल्टा बीते दिनों धनबाद पहुंचे थे. जेल से नीरज तिवारी, सुनील चौधरी और रवि ठाकुर को रिमांड पर लेकर सर्किट हाउस लाया गया था. मामले का सूत्रधार बताये जा रहे राजीव राय को भी सीआइडी सर्किट हाउस लायी थी. वहीं एडीजी ने सभी आरोपियों के साथ निरसा एसडीपीओ व तत्कालीन थानेदार, रेड में शामिल पुलिसकर्मियों से उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की थी.

CID ने अपने जिम्मे ली है जांच

गांजा तस्करी के फर्जी मामले में निर्दोष ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष को धनबाद पुलिस ने जेल भेज दिया था. 20 मई को इस कांड की जांच का प्रभार तत्काल प्रभाव से सीआइडी ने अपने जिम्मे ले लिया था. मामले में धनबाद के पुलिस अफसरों पर आरोप है कि किसी के कहने पर ईसीएल कर्मी को फर्जी मामले में फंसाया गया था. सवाल उठ रहा है कि किसके कहने पर? एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर गांजा कहां से लाया गया? पुलिस ने खुद रखा या किसी दूसरे तस्कर से मंगाया?

इस कांड के अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व डीएसपी रैंक के पदाधिकारी कर रहे हैं. इंस्पेक्टर, दारोगा और एएसआइ रैंक के पदाधिकारी इस कांड में सहयोग कर रहे हैं.

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क्या है मामला

25 अगस्त, 2019 को धनबाद के निरसा में पुलिस ने एक सेवरले गाड़ी से 39.300 किलो गांजा बरामद किया था. इस मामले में धनबाद पुलिस ने ईसीएल कर्मी चिरंजित घोष को गांजा तस्करी का किंगपिन बताते हुए आरोपी बनाया था. धनबाद पुलिस ने इस मामले में चिरंजीत को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था. चिरंजीत के जेल भेजे जाने के बाद उसकी पत्नी ने तत्कालीन डीजीपी केएन चौबे समेत राज्य पुलिस के अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर इंसाफ की गुहार लगायी थी.

चिरंजीत की पत्नी के मुताबिक, उसके पति को बंगाल पुलिस के एक अधिकारी ने साजिश कर फंसाया था. जिसके बाद मुख्यालय स्तर से मामले की जांच करायी गयी. जांच में यह साबित हुआ था कि चिरंजीत को गलत तरीके से फंसा कर जेल भेजा गया था. पुलिस ने पोल खुलने के बाद कोर्ट में तथ्यों की भूल बताते हुए चिरंजीत को रिहा कराया था.

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