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चुनाव खत्म होते ही महंगाई ‘डायन’ की मार शुरू

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Girish Malviya

जैसा हम सोच रहे थे वैसा ही हुआ है, चुनाव निपटते ही आम आदमी पर महंगाई की मार पड़नी शुरू हो गई है. गुजरात की को-ऑपरेटिव संस्था अमूल ने दूध के दामों में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है.

इससे पहले इतनी बड़ी वृद्धि पहले कभी नहीं देखी गयी. इसका फायदा लेकर सभी शहरों में दाम बढ़ा दिए जाएंगे.

वैसे लगातार दूसरे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं. अब यह सिलसिला रुकने वाला नही है. धीरे-धीरे करके यह दाम 4 से 5 रुपए बढ़ा दिए जाएंगे.

जिसका सीधा असर खाद्य सामग्री की कीमतों पर पड़ेगा. इसके अलावा आगामी दिनों में आप गाड़ियों का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी महंगा होना निश्चित ही समझिए.

इंश्योरेंस रेग्यूलेटरी एंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने मौजूदा वित्त वर्ष में एक हजार सीसी से कम की कारों के लिए मोटर थर्ड पार्टी (टीपी) की प्रीमियम दर को बढ़ाकर 2,120 किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

जबकि 2019-20 के वित्त वर्ष में यह 1,850 रुपए है. वहीं, एक हजार सीसी से 1500 सीसी के बीच की गाड़ियों के प्रीमियम को 2836 रुपए से बढ़ाकर 3300 किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

हालांकि, 1500 सीसी से ऊपर की लग्जरी गाड़ियां के टीपी प्रीमियम में किसी तरह के फेरबदल की बात नही की गयी है. आखिर लग्जरी गाड़ी रखने वालों ने चुनावी चन्दा दिया है तो उन्हें इतनी छूट तो दी जानी. चैये की नई चैये.

जब एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि मध्यम वर्ग पीठ पर इतने कोड़े झेलने के बाद भी शिकायत नहीं कर रहा है. तो दो-चार कोड़े तो और हंसी-खुशी झेल लेगा.

एक खबर तो हम आपको बताना भूल ही गए पिछले कुछ दिनों से दाल की बढ़ती कीमतों से जनता बेहाल हो रही है. थोक में दालों के दामों में चार से पाच रुपये का इजाफा हुआ है.

लेकिन रिटेल बाजार में तो सीधे दस से पंद्रह रुपये की बढ़ोतरी हो गई है. चुनाव की भागमभाग में दालों की आवक कम ही रह गई है. व्यापारी बता रहे हैं कि दलहन की खेती में किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है. जिस कारण इसकी बुआई कम हुई है. यही कारण है कि दाम बढ़े हैं.

हमें तो लगता है किसान साफ झूठ बोल रहा है, जब मोदी जी ने समर्थन मूल्य को दोगुना कर दिया है तो यह बात कैसे मानी जा सकती है भला?

जब किसान खुश हैं, जवान भी खुश हैं, मीडिया भी खुश हैं…. नारे लगा रहा है कि ‘आयेगा तो मोदी ही’, ‘मोदी है तो मुमकिन है’, तो क्यों परवाह करे आने दीजिए तो इस ससुरी ‘महंगाई डायन’ को.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनकी निजी राय है.)

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