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चीनी राष्ट्रपति का दौरा भारत के किसानों-व्यापारियों के लिए काल साबित होगा

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Girish Malviya

मोदी जी के निमंत्रण पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर आ रहे हैं. दोनों के बीच चार-पांच मुद्दे डिस्कस किये जाएंगे. लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण मसला है वह है RCEP समझौता.

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16 देशों के बीच आपस में मुक्त व्यापार के लिये किये जाने वाली यह क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (रीजनल कप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप) भारतीय व्यापारियो की कमर तोड़ देगा. और आयात-निर्यात का बैलेंस पूरी तरह से चीन के पक्ष में झुक जाएगा.

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कहा जा रहा है कि 16 देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार संधि (FTA) के तहत चीन से मंगाए जाने वाले 80% सामान पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती कर सकता है या उसे पूरी तरह खत्म कर सकता है. चीनी राष्ट्रपति इसी संदर्भ में बात करने के लिए यहां आ रहे हैं.

इस योजना के मुताबिक, भारत चीन से मंगाए जाने वाले 28% सामान पर लगने वाली कस्टम्स ड्यूटी तुरंत हटाएगा, जबकि दूसरे सामान पर लगने वाला आयात शुल्क 5, 10, 15 और 20 साल में घटाया या खत्म किया जाएगा.

RCEP समझौते पर नवंबर के शुरू में थाईलैंड में होने वाली बैठक में हस्ताक्षर किये जाने हैं. RCEP के 16 सदस्य देश हैं, उनमें से 11 देशों के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट है यानी व्यापार घाटा है.

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भारत ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से मंगाये जाने वाले 86% सामान और आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया से आनेवाले 90% माल से आयात शुल्क घटाने की योजना बनाई है. लेकिन इससे सबसे ज्यादा फायदा चीन को होने जा रहा है.

चीन के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट 2018-19 में $53.6 का था. कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, एक्सपोर्ट के हिसाब से भारत दुनिया का 24वां बड़ा देश है, जो चीन को अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करता है. वहीं, चीन के लिए भारत 7वां सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बन चुका है. यानी भारत को सामान बेचने के मामले में चीन काफी आगे है.

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भारत का सर्वाधिक व्यापार घाटा पड़ोसी देश चीन के साथ 63 अरब डालर 2017-18 में दर्ज किया गया. जो वर्ष 2013-14 में 36.2 अरब डॉलर का था.

मोदी राज में इसमे अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है. साथ ही इसका मतलब यह है कि चीन के साथ व्यापार भारत के हित में कम तथा इस पड़ोसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अधिक फ़ायदेमंद है.

दरअसल चीन ने कुछ ऐसे मानक तय कर रखे हैं, जिनकी वजह से भारतीय सामान चीनी बाजारों तक पहुंच ही नहीं पाते, जबकि चीन से आने वाला सामान बेरोकटोक यहां आता है.

यानी चीन अपने मानक बनाने को लेकर स्वतंत्र है, लेकिन जैसे ही हम भारतीय सरकार से भारत में चीन के माल पर प्रतिबंध की बात करते हैं, RCEP जैसे समझौते करने की बात की जाती है.
मुक्त व्यापार समझौतों के तहत विदेशों से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया जाने की बात है.

आयात शुल्क कम होने से विदेशी उत्पाद सस्ते हो जाएंगे, जिससे हमारे किसानों के उत्पाद नहीं बिक पाएंगे. भारत मे कृषि की हालत पिछले 5 सालों में बहुत बुरी हो गयी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता उत्पादों की मांग लगातार कम हो रही है.

किसानों की आय में बढ़त छोड़िए कमी दर्ज की जा रही हैं और ऐसे माहौल में यह RCEP समझौता भारतीय कृषक समाज की रही सही उम्मीद भी खत्म कर देगा.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनकी निजी राय है)

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