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अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ  : सैटेलाइट तस्वीरों ने की अरुणाचल के नेताओं के दावों की पुष्टि  

NewDelhi :चीन द्वारा भारत में घुसपैठ करने और अन्जॉ जिले के बिशिंग गांव में दो किलोमीटर लंबा पुल बनाने के अरुणाचल प्रदेश के नेताओं के दावे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस हैंडल्स से मिली सैटेलाइट तस्वीरें पुष्टि कर रही हैं.  जान लें कि इस साल जुलाई में अरुणाचल  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद तापिर गाओ और नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी   (एनपीपी) के राज्य अध्यक्ष गिशो कबाक ने स्थानीय मीडिया ते कहा था कि चीन ने ऊपरी सियांग जिले के टुटिंग उप-मंडल स्थित बिशिंग गांव में सड़क का निर्माण किया है.

एनपीपी ने छह जुलाई को अपने बयान में कहा था कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि राज्य या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी ने आज तक इस घटना का आकलन करने के लिए बिशिंग गांव का दौरा नहीं किया. कहा कि ठीक समय पर उनकी यात्रा अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब रहने वाले ग्रामीणों का मनोबल बढ़ानेवाली होती.

जान लें कि चार सितंबर को लोकसभा सांसद तापिर गाओ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा किया था, जिसमें भाप से निर्मित एक नवनिर्मित लकड़ी के पुल को चित्रित किया गया था, जिसकी पहचान जिले के दूरस्थ चगलम क्षेत्र में कियोमू नाले के रूप में की गयी थी. गाओ का दावा था कि इस पुल को चीनी सेना ने भारत के अंदर लगभग 25 किलोमीटर अंदर घुसने के बाद बनाया था. यह भी कहा कि  वहां के कुछ युवाओं ने तीन सितंबर को इस पर ध्यान दिया था.

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भारतीय सेना के एक गश्ती दल ने इलाके में चीनी सैनिकों को देखा था

इस क्रम में गाओ ने दावा किया कि भारतीय सेना के एक गश्ती दल ने पिछले साल अक्टूबर में इलाके में चीनी सैनिकों को देखा था. गाओ ने पत्रकारों से कहा, राज्य के प्रतिनिधि के तौर पर मैंने केंद्र सरकार से अरुणाचल प्रदेश में चीन-भारत सीमा पर उसी तरह बुनियादी संरचना के निर्माण करने का अनुरोध किया है,  जिस तरह अन्जॉ के जिला मुख्यालय हायुलियांग से चगलागम तक और उससे आगे सड़क बनायी गयी है. गाओ ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हायुलियांग और चगलागम के बीच सड़क की हालत बहुत खराब है और इससे आगे एक तरह से कोई सड़क नहीं है.

टीवी चैनलों और अन्य मीडिया द्वारा संपर्क किये जाने पर सेना ने स्पष्ट रूप से इसका खंडन किया. भारतीय सेना ने एक विज्ञप्ति में कहा कि जिस इलाके की बात हो रही है, उसे फिश टेल कहा जाता है और दोनों पक्षों की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं.इसमें कहा गया कि यह घना निर्जन इलाका है और यहां नालों तथा जलधाराओं के पास सारी आवाजाही पैदल ही संभव है. मॉनसून के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के गश्तीदल ने आवाजाही के लिए अस्थाई पुलों का निर्माण किया था. सेना ने यह बात दोहराई कि क्षेत्र में चीनी जवानों या नागरिकों की कोई स्थाई मौजूदगी नहीं है और हमारे जवान निगरानी रखते हैं.

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ अभिजीत अय्यर-मित्रा ने  गाओ और कबाक के दावों का समर्थन किया

सात सितंबर को द प्रिंट में  प्रकाशित एक लेख में सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ अभिजीत अय्यर-मित्रा ने स्वतंत्र रूप से प्राप्त उपग्रह चित्रों की मदद से गाओ और कबाक के दावों का समर्थन किया है.  हालांकि, अय्यर-मित्रा ने कहा कि उन्हें राज्य के चगलगाम क्षेत्र में घुसपैठ का कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला,  लेकिन विभिन्न ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस या ओएसआईएनटी से मदद के आधार पर जो पता चला है वह  गंभीर है. चगलगाम से लगभग 175 किलोमीटर दूर बिशिंग के उत्तरी क्षेत्र में न केवल चीनियों ने घुसपैठ की है, बल्कि उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 1 किलोमीटर गहरी सड़क भी बनाई है.

द वायर के अनुसार गाओ ने कहा कि  मेरा सवाल यह है कि अगर चीन ने उस लकड़ी के पुल का निर्माण चगलगाम में नहीं किया, तो किसने किया? वहां कोई अरुणाचल का कोई ग्रामीण नहीं हैं. यदि बिशिंग में सड़क का निर्माण उसने नहीं किया तो किसने किया? यहां सबसे बड़ा सवाल जो मैं उठा रहा हूं वह यह है कि इसे हल्के में मत लीजिए. हमने 1962 और हाल ही में डोकलाम को भी देखा है. अरुणाचल में कोई डोकलाम नहीं होना चाहिए. अय्यर-मित्रा ने अपने लेख में कहा कि बहुत अधिक संभावना है कि सड़क निर्माण परियोजना जमीनी स्तर पर आभासी बातों की तुलना में वास्तविकता को पेश करने को लेकर है.

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भारत और चीन करीब 4000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं

इस क्रम मं  भारतीय सेना के बयान में  कहा गया कि भारत और चीन के पास सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी मुद्दों पर ध्यान देने के लिए भलीभांति स्थापित कूटनीतिक और सैन्य प्रणालियां हैं. इसमें कहा गया कि दोनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि संपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के सुगम विकास के लिए भारत-चीन सीमा के सभी क्षेत्रों में अमन चैन बनाये रखना जरूरी है.

बयान के अनुसार दोनों देशों ने राजनीतिक मानकों तथा दिशानिर्देशक सिद्धांतों पर 2005 के समझौते के आधार पर सीमा के सवाल पर निष्पक्ष, तर्कसंगत और परस्पर स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई है. भारत और चीन करीब 4000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं जिसका स्पष्ट निर्धारण नहीं है. इस वजह से क्षेत्र में घुसपैठ के मामले सामने आते हैं.

जान लें कि  जून 2017 में सिक्किम के डोकलाम में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच भारत-चीन-भूटान के बीच त्रिकोणीय जंक्शन पर चीन द्वारा सड़क निर्माण को लेकर गतिरोध पैदा हो गया था. गतिरोध के कारण एक महीने तक दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था. बदलते घटनाक्रम के बीच  अगस्त  में चीन और भारत सराकर दोनों ने घोषणा की कि वे अपनी सेना साइट से हटा लेंगे.

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