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चीन ने कहा, दलाई लामा के उत्तराधिकारी के लिए मान्यता लेनी होगी, अस्पताल में हैं लामा

NewDelhi : तिब्ब्ती धर्मगुरु दलाई लामा फेफड़े में संक्रमण के इलाज के लिए  दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हैं. अस्पताल के अनुसार 83 साल के दलाई लामा की हालत स्थिर है. इस खबर के बाद चीन ने एकबार फिर दोहराया है कि उनके उत्तराधिकारी के लिए पेइचिंग से मान्यता जरूरी होगी. पेइचिंग दलाई लामा को एक अलगाववादी के रूप में देखता है, जो तिब्बत को चीन से अलग करना चाहते हैं.  हालांकि 1989 में नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित दलाई  लामा का कहना है कि वह सिर्फ तिब्बतियों के लिए अधिकार चाहते हैं जिनमें धार्मिक आजादी और स्वायत्तता शामिल है.

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पुनर्जन्म तिब्बती बौधों की मूलभूत व्यवस्था है

बता दें कि  जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग से पत्रकारों ने पूछा कि क्या दलाई के उत्तराधिकारी को घोषित करने की कोई योजना है तो उन्होंने कहा कि पुनर्जन्म व्यवस्था के तहत चुने गये उत्तराधिकारी को चीन की मंजूरी की जरूरत होगी. बता दें कि पिछले महीने ही चीन ने दलाई लामा के उस बयान को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका उत्तराधिकारी भारतीय होगा और चीन द्वारा चुने गये व्यक्ति को मान्यता नहीं दी जायेगी.  उन्होने कहा, मैं 14वें दलाई लामा की शारीरिक स्थिति के बारे में अवगत नहीं हूं.

जहां तक पुनर्जन्म के मसले का सवाल है यह स्पष्ट है कि यह तिब्बती बौधों की मूलभूत व्यवस्था है.  यह एक तय रीति-रिवाज है.  कांग ने कहा, इस धरोहर को सम्मान देने और संरक्षित करने के लिए हमारे पास संबंधित नियामक हैं. 14वें दलाई लामा को तय धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत चुना गया था और तब उन्हें तत्कालीन सरकार ने मान्यता दी थी.  यानी कि पुनर्जन्म की प्रक्रिया के बाद दलाई लामा को राष्ट्रीय कानूनों, नियमों और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करना होता है.

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