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गृह मंत्री #Amit_Shah अरुणाचल यात्रा पर, चीन ने जताई आपत्ति, कहा, यह क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है

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Itanagar/Beijing : चीन ने अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह की राज्य की यात्रा पर आपत्ति जताई और कहा कि उनकी यात्रा बीजिंग की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है और आपसी राजनीतिक विश्वास पर प्रहार करती है. चीन ने कहा कि वह उनकी यात्रा का दृढ़ता से विरोध करता है. अमित शाह राज्य के 34वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए अरुणाचल प्रदेश में हैं. इस दौरान वह उद्योग और सड़कों से जुड़ी अनेक परियानाओं का शुभारंभ भी करेंगे.

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पूर्वोत्तर उग्रवाद से मुक्त हो जायेगा

शाह ने अरुणाचल प्रदेश में कहा कि Article 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के बाद यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि अनुच्छेद 371 भी खत्म किया जायेगा, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा. वर्ष 2014 से पहले तक पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के बाकी हिस्सों के साथ केवल भौगोलिक रूप से जुड़ा था, असल जुड़ाव तो मोदी मोदी सरकार चाहती है कि पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र उग्रवाद, सीमाओं को लेकर अंतर-सरकारी संघर्ष जैसी समस्याओं से मुक्त हो. वर्ष 2024 में जब हम वोट मांगने आयेंगें तो तब तक पूर्वोत्तर उग्रवाद, अंतरराज्यीय संघर्ष जैसी समस्याओं से मुक्त हो चुका होगा.

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चीन अरुणाचल प्रदेश  पर अपना दावा करता है

बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानते हुए उस पर अपना दावा करता है और भारत के किसी भी नेता की इस पूर्वोत्तर राज्य की यात्रा पर आपत्ति जताता है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने एक प्रश्न के उत्तर में यहां ऑनलाइन मीडिया से कहा, चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से के बारे में या चीन के तिब्बत क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से के बारे में चीन की राय बिल्कुल स्पष्ट और अपरिवर्तित है.

सीमा विवाद के हल के लिए बातचीत के 22 दौर हो चुके हैं

उन्होंने कहा चीन की सरकार ने तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दी और वह चीन के तिब्बती क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से में भारतीय नेता की यात्रा का विरोध करता है क्योंकि इसने चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किया है,सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिरता को कमतर किया है, आपसी राजनीतिक विश्वास पर प्रहार किया है और प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन किया है, प्रवक्ता ने कहा, चीनी पक्ष भारतीय पक्ष से सीमा के मुद्दे को और जटिल बनाने वाली ऐसी किसी प्रकार की कार्रवाई को रोकने और सीमाई क्षेत्र में शांति बनाये रखने के लिए ठोस कार्रवाई करने की अपील करता है.

जान लें कि 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा तक भारत-चीन सीमा विवाद है. चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के हल के लिए विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत के 22 दौर हो चुके हैं.

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