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भारत की 38 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर चीन ने कर रखा है कब्जा, संसद में बोली सरकार

New Delhi: भारत की 38 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर चीन ने कब्जा कर रखा है. यह काम वह पिछले 6 दशक से कर रहा है. ये बात सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कही. विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पिछले 6 दशकों से चीन करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है. उन्होंने कहा कि 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ के तहत पाकिस्तान ने लद्दाख में अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों से शक्सगाम घाटी में 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था. भारत सरकार ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी और लगातार इसे अवैध और अमान्य बताया है.

मुरलीधरन ने कहा कि भारत और चीन के वरिष्ठ कमांडरों के बीच आखिरी दौर की बातचीत 12 जनवरी को हुई थी और वे इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को अपने नेताओं द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का पालन करना चाहिए. शेष मुद्दों के समाधान के लिए जल्द से जल्द काम करना चाहिए, क्योंकि इससे क्षेत्र में शांति बहाल करने और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति को सक्षम बनाने में मदद मिलेगी.

उन्होंने ये भी कहा कि सरकार ने भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा कुछ स्थानों के नाम बदलने की रिपोर्ट को नोट किया है. ये एक निरर्थक कवायद है जो इस तथ्य को नहीं बदलेगी कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, है और रहेगा. सरकार इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ भारत की रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए बुनियादी ढांचे के सुधार पर विशेष ध्यान देती है.

केंद्र की ओर से कहा गया कि भारत की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सभी घटनाक्रमों पर सरकार लगातार नजर रखती है और ये सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाती है कि हमारे सुरक्षा हितों की पूरी तरह रक्षा हो. इसके अलावा लोकसभा में एक लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि केंद्र ने लद्दाख में पैंगोंग झील पर चीन द्वारा बनाए जा रहे अवैध पुल पर ध्यान दिया है. यह पुल उन इलाकों में बनाया जा रहा है, जो 1962 से चीन के अवैध कब्जे में हैं.

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इससे पहले चीन के मुद्दे पर कांग्रेस राहुल गांधी ने 3 फरवरी को को संसद में केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि केंद्र की गलत नीतियों के चलते चीन और पाकिस्तान साथ हो गए. राहुल ने संसद में भारत सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा था, ‘आपकी नीति ने चीन और पाकिस्तान को एकजुट करने का काम किया है और यह सबसे बड़ी चुनौती भारत के सामने है. राहुल ने कहा था कि चीन के पास एक क्लियर प्लान है और उसकी नींव डोकलम और लद्दाख में रखी है.

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