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सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर गलत आदतों में लिप्त हो रहे हैं बच्चे : डॉ महुआ माजी

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Ranchi : सोशल मीडिया वर्तमान समय में हर किसी की जरूरत बन गया है. जमाना ऐसा हो गया है, जहां लोग सुबह उठते ही मोबाइल देखना पसंद करते हैं. इंटरनेट के जाल में लोग इस तरह फंसते जा रहे हैं कि उन्हें अच्छी-बुरी बातों की समझ नहीं रह जाती. बच्चों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. उक्त बातें झारखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ महुआ माजी ने कहीं. वह शनिवार को सोशल मीडिया की आंधी में बच्चों की परवरिश विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से जहां ज्ञान अर्जन होता है, वहीं इसके कई कुप्रभाव भी हैं, जिन्हें लोग समझ नहीं पाते. यदि अभी बच्चों को इस जाल से मुक्त नहीं कराया गया, तो आनेवाले समय में स्थिति और भी घातक होगी. सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर बच्चे गलत आदतों में लिप्त हो रहे हैं.

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समाज से दूर हो रहे हैं बच्चे

डॉ महुआ माजी ने कहा कि सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर बच्चे परिवार और समाज से दूर हो रहे हैं. अधिकांश समय वाट्सएप और फेसबुक में लिप्त रहने के कारण बच्चों में सामाजिक कार्यों की समझ कम हो रही है. पहले जहां बच्चे रीति-रिवाजों और साहित्यों में समय व्यतीत करते थे, वही स्थान अब सोशल मीडिया ने ले लिया है.

बुरी आदतों के शिकार हो रहे बच्चे

उन्होंने कहा कि कई मामले ऐसे देखे जाते हैं कि बच्चे इंटरनेट के प्रभाव के कारण चोरी समेत अन्य बुरी आदतों के शिकार होते जा रहे हैं. इसे अभिभावक भी नहीं समझ पाते. अच्छे-अच्छे स्कूलों और संभ्रात परिवार के बच्चों में यह अधिक देखा जाता है. सहपाठियों के बीच रौब दिखाने के लिए भी बच्चे ऐसे कार्यों में लिप्त देखे जाते हैं.

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बच्चों के दोस्त बनें माता-पिता

डॉ महुआ माजी ने कहा कि इन समस्याओं का सबसे अच्छा निदान है कि अभिभावक बच्चों के दोस्त बनें, न कि उनके साथ सख्ती से पेश आयें. क्योंकि दोस्त के समान व्यवहार करने पर बच्चे अभिभावकों से हर बात सरलता से कह सकते हैं. अभिभावकों को भी चाहिए कि बच्चों की मानसिकता को समझते हुए समस्या का निदान करें.

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माताएं खुद में करें सुधार

संगोष्ठी में मौजूद डॉ माया प्रसाद ने कहा कि बच्चों का अधिकांश समय माताओं के साथ बीतता है. ऐसे में माताओं को चाहिए की खुद सोशल मीडिया का अधिक प्रयोग न कर बच्चों के साथ समय बितायें. उन्होंने कहा कि आजकल देखा जाता है कि माताएं खुद रात के 12 बजे तक इंटरनेट में लगी रहती हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चे भी वही सीखेंगे. इसलिए बच्चों में सुधार से पूर्व माताएं स्वयं में सुधार करें.

ये थे मौजूद

मौके पर सरिता बथवाल, डॉ पंपा सेन विश्वास, सुषमा केरकेट्टा, रूपा अग्रवाल, नरेश बंका, विनोद, मीरा बथवाल, कौशल कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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