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मुख्यमंत्री रघुवर दास के सीएम डैश बोर्ड और विभागों के आंकड़ों में काफी भिन्नता

Deepak

Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास के सीएम डैश बोर्ड में सरकार के सभी विभागों की उपलब्धियों के आंकड़े प्रचारित किये जा रहे हैं. मध्यप्रदेश की तर्ज पर सीएम डैश बोर्ड विकसित किया गया है, ताकि एक ही क्लिक पर सरकार के महत्वपूर्ण जानकारियां लोगों को मिल सकें. डैश बोर्ड में मनरेगा, उच्चतर शिक्षा, राजस्व वसूली, केंद्रीय सहायता, बिजली की स्थिति, जीएसटी कलेक्शन, ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य चीजों की जानकारियां दी गयी हैं. इन आंकड़ों और विभाग के प्रकाशित आंकड़ों में काफी भिन्नता है.

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क्या कहता है सीएम डैश बोर्ड

सीएम डैश बोर्ड में कहा गया है कि राज्य के 2.014 लाख सखी मंडलों को क्रेडिट लिंकेज की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. वहीं मनरेगा में दावा किया जा रहा है कि सरकार ने 80.55 लाख ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार उपलब्ध कराया है. इसमें से 30.33 लाख एक्टिव वर्कर हैं, जिन्हें 3.67 लाख योजनाओं में लगाया गया है.

डैश बोर्ड में कहा जा रहा है कि राज्यभर में 365 कॉलेजों से छात्रों को बेहतर उच्चतर शिक्षा प्रदान की जा रही है. नामांकन दर 11.65 होने का दावा किया गया है. वहीं उदय योजना में राज्य के ट्रांसमिशन आधारभूत संरचना से बिजली की हानि 36.9 फीसदी बतायी गयी है.

राज्य सरकार द्वारा 130.91 लाख एलइडी बल्ब के वितरण करने का दावा किया गया है. सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा 21.59 लाख चालान जेनरेट किये गये हैं और 1050 करोड़ के राजस्व की वसूली की गयी है.

डैश बोर्ड में यह भी कहा गया है कि प्रत्यक्ष नगद हस्तांतरण की सुविधा 2.27 करोड़ की आबादी को दी जा रही है, जिसमें अब तक 10275.29 करोड़ रुपये दिये गये हैं. केंद्र से सरकार को 2018-19 में 28 हजार करोड़ रुपये केंद्रीय कर के अंशदान से प्राप्त हुई है, जो इस वित्तीय वर्ष में बढ़कर 32500 करोड़ तक पहुंच जायेगा.

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क्या है हकीकत

सरकार के ही आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 और विभागीय आंकड़ों में इन आंकड़ों में काफी भिन्नता है. ग्रामीण विकास विभाग के आजीविका मिशन के तहत 21.02 लाख परिवारों को सखी मंडलों से जोड़ा गया है. यह 2018-19 के आंकड़े हैं. यह परिवार 19,694 गांवों और 54 प्रखंडों के हैं. ये परिवार 1.77 लाख महिला स्वंय सहायता समूहों के अंतर्गत विभिन्न आजीविका मिशन से जुड़े हैं.

इनमें से 658 समूहों को ही क्रेडिट लिंकेज की सुविधा बैंकों से प्रदान की गयी है. मनरेगा योजना में 2017-18 में 19.08 जॉब कार्डधारकों को रोजगार के अवसर प्रदान किये गये, वहीं 2018-19 में 13.41 लाख कार्डधारकों को ही मजदूरी का अवसर मिल पाया.

2015-16 से लेकर 2017-18 तक सरकार सिर्फ 1,34647 योजनाएं ही मनरेगा के तहत ले पायी. उच्चतर और तकनीकी शिक्षा विभाग की बात करें, तो राज्य में 14 विवि के तहत 328 संबद्ध कॉलेज हैं. जहां पर नामांकन दर 11.67 फीसदी है.

सरकार इस नामांकन दर को 2020-21 तक 18.7 फीसदी तक ले जायेगी. जहां तक केंद्रीय कर में झारखंड की सहभागिता का प्रश्न है, तो 2018-19 में केंद्र से झारखंड को 27 हजार करोड़ ही मिले.

जीएसटी के दौर में जुलाई 2017 से लेकर मार्च 2018 तक झारखंड को 6139.40 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए. झारखंड में अब भी पीक आवर में बिजली की कमी 119 मेगावाट की है. यह 2016-17 की तुलना में कम हुई है. 32-34 फीसदी बिजली का लॉस आज भी बेहतर ट्रांसमिशन नेटवर्क नहीं रहने से हो रहा है.

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