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श्रमिकों का रोजगार सुनिश्चित करने में जुटे हैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

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  • योजनाएं लाकर और कई संस्थाओं से एग्रीमेंट कर श्रमिकों के रोजगार सुरक्षित कर रही हेमंत सरकार

Ranchi  :  इन दिनों में पूरे देश में भाजपा के लाये श्रम कानून को लेकर श्रमिकों में काफी रोष दिखाई दे रहा है. विपक्ष सहित कई श्रम संगठनों ने मोदी सरकार की इस पहल का विरोध किया है.

इनका कहना है कि केंद्र सरकार इन कानूनों से देश के श्रमिकों के रोजगार छीनने की तैयारी में है. वहीं हेमंत सरकार अपने अभी तक के 9 माह के शासन में राज्य के श्रमिकों के रोजगार को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव काम किये है.

इसके लिए हेमंत सरकार ने बीते दिनों कई योजनाओं की शुरूआत तो की है, वहीं आला अधिकारियों को श्रमिकों के हित में काम करने के साथ कई संस्थाओं के साथ एग्रीमेंट भी किये है.

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नये श्रम कानून से स्थायी रोजगार की जगह कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स को मिलेगा बढ़ावा :  विपक्ष

केंद्र के लाये श्रम सुधार विधेयकों को लेकर हेमंत सरकार के सभी सहयोगी दलों का कहना है कि इससे कंपनियों को श्रमिकों पर अत्याचार करने के कई रास्ते खुलेंगे. अब कंपनियों को बंद करने की बाधाएं खत्म होंगी. अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की इजाजत के बिना कर्मचारियों को निकालने की अनुमति होगी. कंपनियों के लिए कर्मचारियों की हायरिंग और फायरिंग करना आसान होगा. साथ ही कर्मचारी यूनियनों की ओर से श्रमिकों के हित में हड़ताल का आयोजन कर पाना मुश्किल होगा.

इस नये कानून में स्थायी रोजगार की जगह कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स को काफी बढ़ावा दिया गया है. इससे श्रमिक संगठनों और विपक्ष आंदोलनरत है.

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श्रमिकों के रोजगार सुनिश्चित करने के लिए हेमंत सरकार की पहल

दूसरी तरफ हेमंत सरकार श्रमिकों के रोजगार सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है. राज्य में काम कर रहे या बाहर कार्यरत श्रमिकों के हित में हेमंत सरकार की मुख्य पहल इस प्रकार हैं:

  • एमओयू कर सुरक्षा, सेहत, राशन भत्ता और चिकित्सा बीमा किया सुनिश्चित

हेमंत सोरेन ने यह घोषणा की थी कि अंतरराज्यीय प्रवासी कानून के तहत ही राज्य का कोई भी मजदूर अब काम  की तलाश में राज्य से बाहर जायेगा. हेमंत सरकार ने इसके लिए बीते जून 2020 को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) किया था. एमओयू के तहत बीआरओ राज्य से 11815 लोगों को भर्ती करेगा. यह अनुमति सीएम ने इस शर्त के साथ दी है कि मज़दूरों की सुरक्षा और सेहत का पूरा ध्यान रखा जायेगा. अन्य लाभों के साथ-साथ राशन भत्ता, चिकित्सा बीमा भी मुहैया कराना होगा. वहीं बिचौलियों की जगह अब सीधे सरकार के साथ समझौता करना होगा.

  • घर के पास रोजगार दिलाने की कवायद

जून माह में ही एक बैठक कर सीएम हेमंत सोरेन ने सभी जिले के डीसी को निर्देश दिया था कि श्रमिकों की कुशलता पहचानने और क्षेत्र के उद्योगों की मानव संसाधन की जरूरत की मैपिंग करें. इससे श्रमिकों को उनके घर के पास के उद्योगों में रोजगार मिल सकेगा.

  • मनरेगा की तर्ज पर श्रमिकों को रोजगार देने की योजना की शुरुआत

शहरी क्षेत्र के मजदूरों को मनरेगा की तर्ज पर गारंटी के तहत रोजगार देनी की योजना हेमंत सरकार ने लांच की है. योजना का नाम है, “मुख्यमंत्री श्रमिक (शहरी रोजगार मंजूरी फॉर कामगार) योजना”. इसके तहत लोगों को मनरेगा की तरह कम से कम 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जायेगी. रोजगार नहीं मिंलने पर बेरोजगारी भत्ता भी मिलेगा.

  • रोजगार के साथ चिकित्सा, स्वास्थ्य देखभाल के लिए सरकार ने किया समझौता

बीते दिनों राज्य के मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए श्रम विभाग ने “लेबरनेट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड” के साथ भी एक एमओयू.किया है. समझौते के तहत सरकार मजदूरों को झारखण्ड में ही नहीं बल्कि देश के किसी भी राज्य में रोजगार उपलब्ध करायेगी. इसके लिए लेबरनेट सर्विसेज कामगारों की भर्ती करेगी. साथ ही उनके वेतन और श्रम कानून के तहत चिकित्सा, स्वास्थ्य देखभाल और रहने का आवास भी मुहैया करायेगी.

 

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