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मुख्यमंत्री ने खरीदा सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित तिरंगा, दो दिन में छह लाख के उत्पाद बेचे

Ranchi : मोरहाबादी मैदान में मंगलवार को शुरू हुए झारखंड जनजातीय महोत्सव 2022 में ग्रामीण विकास विकास के अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेसएलपीएस)द्वारा पलाश एवं आदिवा ज्वैलरी के स्टॉल लगा कर सखी मंडल की महिलाओं के उत्पादों की प्रदर्शनी की गयी. इसके साथ ही आजीविका दीदी कैफे के जरिये महोत्सव में आये लोगों को पारंपरिक आदिवासी भोजन भी उपलब्ध कराये गये. महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों का जायजा लेकर उनका उत्साहवर्धन किया. इसके साथ ही स्टॉल में मौजूद सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित तिरंगा खरीदा. वहीं, जेएसएलपीएस द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के तहत हर घर तिरंगा अभियान को लेकर लोगो में जागरुकता लाने के उदेश्य से सेल्फी बूथ लगाया गया, जिसमें बच्चे-बूढ़े सभी ने बड़ी खुशी के साथ तस्वीरें लीं. लोगों ने आजीविका दीदी कैफे में पारंपरिक आदिवासी पकवानों का भी लुफ्त उठाया, सेल्फी बूथ पर तस्वीर लेने के लिए भी भीड़ उमड़ी. सखी मण्डल के उत्पादों का अपना ब्रांड पलाश और पारंपरिक ज्वैलरी कलेक्शन अदिवा ज्वैलरी की काफी डिमांड रही. महोत्सव में लगे स्टॉल के जरिए सखी मण्डल की महिलाओं ने करीब 6 लाख रुपए का कारोबार किया. वर्ष 2020 में झारखंड में सखी मंडल की महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के पलाश ब्रांड की शुरुआत की गयी थी. इससे जुड़ कर वर्तमान में करीब 2 लाख ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को सशक्त कर रही हैं.

पलाश ब्रांड के 29 तरह के उत्पादों की बिक्री

पलाश ब्रांड के अंतर्गत स्टॉल में सखी मंडल की महिलाओं द्वारा तैयार किये गये करीब 29 तरह के उत्पादों को बिक्री के लिए महोत्सव में रखा गया था. जिसमें शुद्ध सरसों तेल, अचार, मधु, मड़ुआ आटा, मसाले, लोबिया, लेमनग्रास एवं साबुन की काफी डिमांड रही. वहीं, पलाश का अचार भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा. जामुन सिरका, कालमेघ, पलाश साबुन, डिटर्जेंट, लिक्विड हैण्डवॉश भी लोगों ने काफी पसंद किया.

राखी के त्यौहार के कारण आदिवा ज्वेलरी की रही मांग

Sanjeevani

महोत्सव में राखी के त्यौहार के मद्देनजर आदिवा ज्वेलरी की बहुत मांग रही. सखी मंडल की बहनों द्वारा निर्मित आदिवासी पारंपरिक ज्वैलरी ब्रांड आदिवा के तहत चांदी एवं अन्य धातुओं से बनी ज्वैलरी, जैसे झुमका, बाली इत्यादि लोगों ने बहुत चाव से खरीदा. राज्य के सांस्कृतिक एवं पारंपरिक आभूषणों को सहेजने एवं नयी पहचान देने की इस पहल को लोगों ने खूब सराहा.

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