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अनिल अंबानी से जुड़े केस के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में चीफ जस्टिस ने दो अधिकारियों को बर्खास्त किया

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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दो न्यायिक अधिकारियों मानव शर्मा और तपन कुमार चक्रवर्ती को बर्खास्त कर दिया है. ये दोनों अधिकारी रिलायंस कम्युनिकेशन के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़े एक मामले के आदेश में छेड़छाड़ में शामिल थे. जांच में इस बात की पुष्टि हुई थी कि सुप्रीम कोर्ट के दो असिस्टेंट रजिस्ट्रारों ने आदेश की कॉपी से छेड़छाड़ की थी. उसके बाद सीजेआइ ने दोनों अधिकारियों को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया.

जस्टिस रोहिंगटन नरीमन ने की थी शिकायत

अनिल अंबानी के खिलाफ अवमानना के मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस रोहिंगटन एफ नरीमन ने इस मामले की शिकायत की थी. सुप्रीम कोर्ट में अंडरटेकिंग देने के बाद भी अनिल अंबानी ने एरिक्सन इंडिया का उधार नहीं चुकाया था. इस मामले में कोर्ट ने उन्हें अवमानना का नोटिस भेजा था. जस्टिस नरीमन ने शिकायत की थी कि अधिकारियों ने उनके बयान को शामिल किए बिना आदेश को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया. मामले की जांच में दोनों अधिकारी दोषी पाये गये. संविधान के अनुच्छेद 311 और सेक्शन 11(13) के तहत सीजेआइ के पास विशेष अधिकार होता है कि विशिष्ट परिस्थितियों में वह किसी भी कर्मचारी को बिना किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के बर्खास्त कर सकते हैं. इस अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सीजेआइ ने दोनों अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया.

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अनिल अंबानी की उपस्थिति को अनिवार्य बताया था जस्टिस नरीमन ने

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 7 जनवरी को जो आदेश अपलोड किया गया, उसमें लिखा कि कथित आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है. जबकि नियम यह है कि जिस भी व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट अवमानना का नोटिस भेजता है उसे एक बार कोर्ट में प्रस्तुत होकर बाद की तारीखों में उपस्थित नहीं होने के लिए अनुमति लेनी होती है. जस्टिस नरीमन ने यह साफ किया था कि अंबानी की उपस्थिति अनिवार्य है. जस्टिस नरीमन ने 10 जनवरी को अपने आदेश की सही कॉपी वेबसाइट पर अपलोड करवाई, जिसमें लिखा था कि अंबानी का कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है. इसके बाद जस्टिस नरीमन ने सीजेआइ से इसकी शिकायत की और जांच के बाद सीजेआइ ने मानव शर्मा और तपन कुमार चक्रवर्ती को सेवा से बर्खास्त कर दिया.

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