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Bagbera Water Project: अब सिर्फ नौ महीने का इंतजार, चीफ इंजीनियर का दावा-बागबेड़ा जलापूर्ति योजना से मार्च से मिलने लगेगा पानी VIDEO

Jamshedpur : अब सिर्फ नौ महीने का इंतजार है. बागबेड़ा जलापूर्ति योजना के तहत मार्च 2023 से लोगों को पानी मिलने लगेगा. यह दावा झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के चीफ इंजीनियर सुरेश प्रसाद ने किया है. शुक्रवार को जमशेदपुर पहुंचकर उन्होंने बागबेड़ा के गिद्दी झोपड़ी फिल्टर प्लांट और बड़ौदा घाट का निरीक्षण किया. साथ ही हाउसिंग कॉलोनी में टंकी के स्थल का भी मुआयना किया. उनके साथ विभाग के अधीक्षण अभियंता शिशिर सोरेन के अलावा बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के अलावा संपूर्ण घाघीडीह विकास समिति के छोटराय किस्कु मौजूद थे. निरीक्षण के बाद चीफ इंजीनियर ने योजना के अब तक धरातल पर नहीं उतरने के लिए विपरित परिस्थितियों को जिम्मेवार ठहराया. उन्होंने कहा कि योजना के लिए पानी लेने से लेकर एजेंसी तक के काम में कई बाधाएं आयी. अब यह बाधाएं दूर हो गई है और तय डेडलाइन पर योजना धरातल पर उतर जाएगी.

सुबोध को नहीं है चीफ इंजीनियर के वायदे पर भरोसा


इधर, इस जलापूर्ति योजना को धरातल पर उतारने के लिए वर्षों से आंदोलनरत बागबेड़ा महानगर और संपूर्ण घाघीडीह विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा को चीफ इंजीनियर के वायदे पर अब भी भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि मार्च 2023 में योजना को पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया जा चुका है. फिर भी विभागीय अधिकारियों का रवैया अब भी समझ से परे है. हाल ही में योजना को जल्द जमीन पर उतारने के लिए समिति के बैनर तले बागबेड़ा से दिल्ली पदयात्रा का कार्यक्रम था, लेकिन रांची के बुंडु के पास आंदोलनकारियों को रोक लिया गया. उस दौरान विभाग के अभियंता प्रमुख के निर्देश पर चीफ इंजीनियर ने ही तीन महीने के भीतर योजना का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था. हालांकि तीन महीने बीत जाने के बाद वे फिल्टर प्लांट का निरीक्षण करने पहुंचे हैं. अब आगे क्या होगा यह तो विभाग के रवैये पर ही निर्भर करेगा, लेकिन योजना का काम तेजी से शुरु होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

Sanjeevani

बागबेड़ा-घाघीडीह के लोगों की हो रही है उपेक्षा-छोटराय

मौके पर आंदोलनकारियों के नेतृत्वकर्ताओं में शामिल छोटराय मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2018 से बागबेड़ा और घाघीडीह के लोगों को इस योजना के तहत पानी देने का सिर्फ आश्वासन ही मिला है. धरातल पर स्थिति यह है कि गोविंदपुर के क्षेत्र के लोगों को तो पानी मिल गया है, लेकिन बागबेड़ा और घाघीडीह के ग्रामीण अब भी उपेक्षित हैं. दूसरी ओर गिद्दी झोपड़ी फिल्टर प्लांट का निर्माण कार्य अब भी आधा-अधूरा है. उसके 11 पीलर का काम अब भी बाकी है. छोटराय मुर्मू ने हर हाल में तय समयसीमा के भीतर क्षेत्र के लोगों को पानी मुहैया कराने की मांग की है.

वर्षों से शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं लोग
बता दें कि विश्व बैंक के सहयोग से वर्ष 2015 में इस योजना का शिलान्यास हुआ था. फिर भी अब तक इस योजना के धरातल पर नहीं उतर के कारण वर्षों से क्षेत्र की जनता शुद्ध पानी के लिए तरह रही है. इसमें बागबेड़ा, परसुडीह, घाघीडीह और किताडीह की 19 पंचायतों में रहनेवाली करीब दो लाख की आबादी है.

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