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छत्तीसगढ़ सरकार का फैसलाः टाटा स्टील प्लांट की जमीन किसानों को मिलेगी वापस

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Raipur: छत्तीसगढ़ की बघेल सरकार ने टाटा स्टील प्लांट के लिए किसानों से ली गई जमीन उन्हें वापस देने का फैसला किया है. बस्तर के लोहंडीगुड़ा में टाटा स्टील प्लांट के लिए करीब 10 साल पहले किसानों से जमीन ली गई थी. देश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जहां उद्योग के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस मिलेगी. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इससे संबंधित निर्देश अधिकारियों को दिये हैं. जमीन वापसी संबंधी प्रस्ताव तैयार होने के बाद जिसे कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा. सीएम के निर्देश के बाद 2008 में अधिग्रहित जमीन को वापस करने की कवायद शुरू हो चुकी है.

राहुल गांधी ने किया था वादा

गौरतलब है कि बघेल के साथ ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बस्तर प्रवास के दौरान लोहांडीगुड़ा क्षेत्र के किसानों को विश्वास दिलाया था कि उनकी अधिग्रहित भूमि उन्हें वापस दिलायी जाएगी. इसके अलावे कांग्रेस ने जनघोषणा पत्र में राज्य के किसानों से यह वादा किया गया है कि औद्योगिक उपयोग के लिए अधिग्रहित कृषि भूमि जिसके अधिग्रहण की तारीख से पांच वर्ष के भीतर उस पर कोई परियोजना स्थापित नहीं की गई है, वह किसानों को वापस की जाएगी.

2008 में हुआ था अधिग्रहण

ज्ञात हो कि 2005 में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने 19500 करोड़ रुपए में बनने वाले टाटा स्टील प्लांट के लिए एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया था. टाटा संयंत्र के लिए यह भूमि फरवरी 2008 और दिसम्बर 2008 में अधिग्रहित की गई थी. संयंत्र के लिए जिन गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया गया था, उनमें तहसील लोहांडीगुड़ा के अंतर्गत छिंदगांव, कुम्हली, बेलियापाल, बडांजी, दाबपाल, बड़ेपरोदा, बेलर और सिरिसगुड़ा गांव तथा तहसील तोकापाल के अंतर्गत टाकरागुड़ा गांव शामिल हैं. इस पर संबंधित कम्पनी द्वारा अब तक कोई उद्योग स्थापित नहीं किया गया है.

अधिग्रहण का हुआ था भारी विरोध

गौरतलब है कि इस भूमि अधिग्रहण का किसानों ने भारी विरोध किया था. इसे लेकर आंदोलन भी हुए थे. नक्सलियों ने एक जनप्रतिनिधि की हत्या भी कर दी थी. इसके बावजूद जमीन अधिगृहित की गई. वहीं, 1707 में से 1165 किसानों को मुआवजा दे दिया गया. लेकिन टाटा ने दो साल पहले यहां अपना प्लाटं लगाने से इनकार कर दिया. ऐसे में किसान अपनी जमीन पर खेती करते रहे. और लगातार अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग कर रहे थे.

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