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छत्तीसगढ़ चुनावः पूर्व आइएएस ओपी चौधरी को ना माया मिली, ना राम

चुनाव लड़ने के लिए कलेक्टर पद से दिया था इस्तीफा, चुनाव भी हारे-सरकार भी गई

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Raipur: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस ने 15 सालों के रमन राज को ढाह दिया. वही बीजेपी से किस्मत आजमा रहे पूर्व आइएएस अधिकारी के लिए ना माया मिली ना राम वाली कहावत चरितार्थ हुई है. रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी ने चुनाव लड़ने के लिए आईएएस की नौकरी छोड़ दी. और भाजपा की टिकट से छत्तीसगढ़ की खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. लेकिन किस्मत ने ऐसा धोखा दिया कि ना तो चुनाव में जीत मिली ना ही राज्य में बीजेपी की सरकार बनी. चौधरी को कांग्रेस उम्मीदवार उमेश पटेल ने मात दी. चौधरी को जहां 77234 मत मिले वहीं उमेश पटेल ने 94201 वोट हासिल कर जीत दर्ज की.

रमन सिंह के हैं करीबी

गौरतलब है कि रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में बीजेपी का हाथ थामा था. वह सीएम रमन सिंह के करीबी माने जाते रहे हैं. नक्सल प्रभावित इलाके में बेहतरीन कार्य के लिए चौधरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.
ओपी चौधरी 2005 बैच के आईएएस अधिकारी ने 25 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दिया था. चौधरी अघरिया समुदाय से आते हैं, और उनका छत्तीसगढ़ में अच्छा वर्चस्व भी बताया जाता है. खास कर के युवा वर्ग में वो काफी लोकप्रिय थे. नौकरी छोड़ने से पहले ओपी चौधरी रायपुर के कलेक्टर थे. इससे पहले वह दंतेवाड़ा में कलेक्टर रह चुके थे. पिछले चुनाव में वह जनसंपर्क विभाग में थे.

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