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बोकारो : करोड़ो के लागत से बने चेक डैमों से एक इंच भी नहीं भीगी जमीन

चास प्रखंड के मेंहदी जोरिया में सिरिज ऑफ चेक डैम योजना के तहत बने थे.

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Bokaro : बोकारो जिले के चास प्रखंड में पांच पंचायत होकर बहने वाली मेंहदी जोरिया में सिरिज आॅफ चेक डैम का निर्माण लघु सिंचाई बोकारो प्रमंडल की ओर से किया गया था. सिरिज आॅफ चेक डैम योजना के तहत जोरिया पर सात अलग-अलग स्थानों पर चेक डैम का निर्माण किया गया, लेकिन इन चेक डैम से अब तक एक इंच भी जमीन सिंचित नहीं हो सकी. जिस कारण सरकार का करोड़ो रुपया पानी में चला गया, या यूं कहे कि विभागीय लूट के भेट चढ़ गया. वर्ष 2012-13 में इन चेक डैमों को बनाया गया. इसके साथ डैम के दोनों ओर माईक्रोलिफ्ट लगाने के लिए घर भी बनाए गए, साथ ही खेतों तक पानी पहंुचाने के लिए पाईप लाईन भी बिछाया गया, वहीं विभाग की ओर से ग्राम समिति का गठन कर हर समिति के अध्यक्ष को एक आठ एचपी का डीजल पंप भी दिया गया, ताकि उसका उपयोग डैम के आस-पास के रहने वाले किसान कर सके, लेकिन कहीं पर वह मशीन नजर नहीं आता.

हर सभी जगह पर मशीन लोगों के घरों में पड़ा हुआ है. अभी उस मशीन का उपयोग अपने निजी कामों में ही किया जा रहा है, न तो विभाग के अधिकारी डैम बनाने के बाद इलाकों को देखने आए, जिसके कारण योजना पूरी तरह से विफल हो गया.

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इन पंचायतों के सैकड़ों किसानों को मिलता लाभ

चास प्रखंड के सुनता, राधानगर,घटियाली पश्चिमी, सिजुआ और सतनपूर के सैकड़ों किसानों को इन सात स्थानों पर बने चेक डैम से सिंचाई की सुविधा मिलती, लेकिन इस दिशा में कभी कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया. जिस कारण डैम में जमा पानी भी किसी के उपयोग का नहीं रहा, कई  स्थानों पर लोग पानी को उपयोग नहाने में करते है, जबकि कई ऐसे स्थानों पर चेक डैम है, जहां पर कभी कोई जाना भी पसंद नहीं करता है.

राधानगर पंचायत के पूर्व उप मुखिया

सुधीर मंडल ने बताया कि जब चेक डैम बन रहें थे, उन दिनों कभी भी विभागीय अधिकारियों ने गांवों में किसी तरह की कोई बैठक नहीं की, वे सिर्फ स्थानों पर अपने मर्जी से करते चले गए और डैम को बना कर निकल गए. जिस कारण ग्रामीणों ने कभी कोई रुची नहीं दिखायी. लिफ्ट का पाईप भी जैसे-तैसे लगाने का का किया गया.

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डैमों में गर्मी आते ही सूख जाती है पानी

पांच पंचायत के सात स्थानों पर जो चेक डैम बनाए गए है. उनमें पानी गर्मी आते ही सूख जाती है. जबकि डैम के बनाने के पीछे लघु सिंचाई विभाग का उद्देश्य रहा है कि हर मौसम में किसान डैम से पानी लिफ्ट कर अपने खेतों तक ले जाए और फसलों का उत्पादन कर सकें. इन पांच पंचायत में सतनपुर गांव जो डैम बना है. उसके पानी का कुछ हद तक ग्रामीण अपने पंप के मदद से फसल का उत्पादन करते है. गर्मी आते ही अन्य छह डैम पूरी तरह से सूख जाते है.

ग्रामीणों का कहना है कि डैम को विभाग के अधिकारियों ने अपने मर्जी से बनाया, जिस कारण उसकी उपयोगिता नहीं के बराबर हो रही है. गुडगुड़ी गांव के रहने वाले सुनील राय ने कहा कि  इस पंचायत में तीन चेक डैम है, पर एक का भी उपयोग नहीं होता है.

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इन डैमों के बारे में कुछ नहीं कह सकता : कार्यपालक अभियंता

लघु सिंचाई विभाग बोकारो प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता विनोद पराशर ने कहा कि इन चेक डैमों की स्थिति को लेकर अभी कुछ नहीं कह सकते. दस दिनों से छुट्टी पर है. हलांकि यह योजना काफी वर्ष पुरानी भी है.

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