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चतराः कल्याणकारी योजनाओं में साढ़े नौ करोड़ का घोटाला, कई अधिकारियों पर गिरी गाज

Chatra: कल्याण विभाग में हुए महाघोटाला मामले में सरकार ने आरोपित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है. कार्मिक विभाग ने उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह की अनुशंसा पर जिले के दो पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इसके अलावे दोनों अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

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इन दोनों के अलावे जिले में पदस्थापन के बाद से बगैर सूचना के लंबे समय से फरार कार्यपालक दंडाधिकारी सुबोध कुमार पर भी गाज गिरी है. उन्हें भी कार्मिक विभाग ने कर्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है. इस बाबत कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना के मुताबिक, निलंबित अधिकारियों को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है.

कल्याण योजनाओं में 9.5 करोड़ का हुआ घोटाला

फाइल फोटो

गौरतलब है कि विकास भवन में संचालित जिला कल्याण पदाधिकारी कार्यालय समेत दो अन्य कार्यालयों में अगलगी की घटना घटी थी. घटना में कार्यालय में रखे सभी दस्तावेज पूरी तरह जलकर राख हो गए थे. घटना के बाद कार्यालय में हुए महाघोटाले की शिकायत के बाद उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह ने डीडीसी जीशान कमर के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन कर कार्यालय द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जांच करवायी था. जांच के दौरान महज दो साल में संचालित योजनाओं की जांच के दौरान करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये का महाघोटाला उजागर हुआ था. दो पूर्व कल्याण पदाधिकारियों आशुतोष कुमार व भोलानाथ लागुरी द्वारा नाजिर व प्रधान सहायक के सहयोग से स्वयंसेवी संस्थाओं व एजेंसियों के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया था.

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17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

इस मामले को लेकर जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी साधना जयपुरियार ने दोनों आरोपित कल्याण पदाधिकारियों समेत 17 लोगों के विरुद्ध गबन व सरकारी राशि के बंदरबांट की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से कार्यपालक दंडाधिकारी आशुतोष कुमार व भोलानाथ लागुरी समेत नाजिर, प्रधान सहायक समेत सभी आरोपी फरार हैं.

इसी मामले में डीसी ने दोनों अधिकारियों के विरुद्ध प्रपत्र को गठित करते हुए सरकार से विभागीय कार्रवाई करते हुए निलंबन की अनुशंसा की थी. वहीं नाजिर और प्रधान सहायक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था. डीसी की अनुशंसा के आधार पर ही कार्मिक विभाग ने कार्रवाई की है.

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पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

छोटे-मोटे मामलों में त्वरित कार्रवाई करने वाली चतरा पुलिस द्वारा महाघोटाले के आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई में बरती जा रही सुस्ती को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. प्राथमिकी दर्ज होने के महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कार्रवाई शुरू नहीं की है. ना ही, न्यायालय से आरोपियों के विरुद्ध वारंट निर्गत करने के लिए पुलिस ने आवेदन दिया है और ना तो उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं. पुलिस की इस लापरवाह शैली से घोटालेबाज अधिकारियों व कर्मियों समेत अन्य अभियुक्त आराम से घूम रहे हैं.

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खुलेआम घूम रहे आरोपी

पुलिस की लापरवाही नीति से उत्साहित आरोपी हजारीबाग व रांची में खुलेआम घूम रहे हैं. वही पुलिस इस पूरे मामले में कार्मिक विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी की बात कर अपना पल्ला झाड़ रही है. लेकिन इन सबके बीच यह बड़ा सवाल उठता है कि आखिर अधिकारियों के अलावे मामले में संलिप्त विभाग के नाजीर व प्रधान सहायक समेत अन्य 15 अभियुक्तों की गिरफ्तारी में लापरवाही क्यों बरत रही है. हालांकि एसपी पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई की बात जरूर कह रहे हैं.

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