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चतरा: योग से निरोग बनेंगे कैदी, सुदर्शन क्रिया से कर रहे गुनाहों का प्रायश्चित

द आर्ट ऑफ लिविंग और जेल प्रबंधन के संयुक्त तत्वाधान में आठ दिवसीय योग शिविर

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Chatra: चतरा मंडल कारा में बंद कैदी इनदिनों खुद को स्वस्थ रखने के लिए योग का सहारा ले रहे हैं. विभिन्न आपराधिक मामलों में बंद बंदी अब योग से निरोग बनेंगे. जेल में बंद करीब 25 बंदी ने सुदर्शन क्रिया और अनुलोम-विलोम के माध्यम से अपने गुनाहों का प्रायश्चित करने में जुटे हैं. द आर्ट ऑफ लिविंग और जेल प्रबंधन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित आठ दिवसीय प्रिजन स्मार्ट योग एवं सुदर्शन क्रिया कार्यक्रम के तहत ये कैदी रोज योग का अभ्यास कर रहे हैं.

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जीने की कला सीख रहे कैदी

जेल में आठ दिवसीय योग शिविर का उद्देश्य कैदियो को स्वस्थ रखना और उनके मन और मस्तिष्क में गलत विचारों का संचार ना होने देना है. योग शिक्षक दीपक कुमार प्रतिदिन बंदियों को विभिन्न लोगों की निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं. वही जेलर विपिन बिहारी मंडल अपनी उपस्थिति में इन बंदियों को नियमित योगाभ्यास भी कराते हैं. जेल में कैदियों में से करीब पांच दर्जन बंदियों को विशिष्ट ध्यान, विधियों, दिव्य खेलो व प्रक्रियाओं के माध्यम से जीवन जीने की कला के स्वर्णिम सूत्र, सुदर्शन क्रिया नामक अद्भुत श्वास प्रक्रिया संहिता, योग, ध्यान, प्राणायाम, सत्संग, सेवा, साधना, नशा मुक्ति, शारीरिक एवं परिवेश की स्वच्छता, खानपान व व्यवहार संबंधित स्वस्थ आदतें व सौहार्द पूर्ण जीवन कौशलों का व्यवहारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

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इसके अलावे योग शिक्षक के द्वारा तनाव मुक्त मन, नशा व रोग मुक्त शरीर के साथ-साथ सुंदर, स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. योग शिक्षक ने बताया कि प्रत्येक दिन आयोजित होने वाले योग कक्षा में बंदियों को सूर्य नमस्कार, नाड़ी शोधन, कपालभाति, भस्त्रिका, त्रिस्तरीय उज्जाई प्राणायाम, वृक्षासन, धनुरासन, नौकासन, त्रिकोणासन, मयूरासन, कटिचक्रासन, भुजंगासन, अर्धमत्स्येंद्रासन एवं योग निद्रा योग कराया जा रहा है.

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वही जेलर विपिन बिहारी मंडल ने कहा कि कैदी जन्म से अपराधी नहीं होता. समाज में उत्पन्न होने वाले विषम परिस्थितियां और समय उन्हें अपराध करने को विवश करती है. ऐसे में हमें अपराधी से नहीं बल्कि अपराध से घृणा करनी चाहिए.

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