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चतरा परिवहन विभागमें अवैध वसूली का गंदा खेल : लाइसेंस और फिटनेश के नाम पर परिवहन विभाग और एमवीआई के दलाल वसूलते हैं मोटी रकम

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Chatra : जिला परिवहन कार्यालय परिसर में लाइसेंस एवं फिटनेश बनाने में बड़े पैमाने पर अवैध राशी की उगाही हो रही है. इस कार्य मे एमवीआई अजय वर्मा की भूमिका संदिग्ध बताई जाती है. प्रत्यक्ष दर्शियों के मुताबिक एमवीआई ने अवैध उगाही के लिए  एक दलाल पाल रखा है जो प्रति सप्ताह एक से डेढ़ लाख रुपये अवैध उगाही करके एमवीआई अजय वर्मा को देता है. गौरतलब है कि एमवीआई(मोटर यान निरीक्षक) को फिटनेस और लाइसेंस जांच के लिए प्रत्येक शुक्रवार को चतरा आना है. परंतु कार्य के अधिकता का बहाना बनाकर एमवीआई साहब माह में एक बार ही “दर्शन” देते हैं ! बाकी सप्ताह इनके दलाल के जिम्मे कार्यालय रहता है.  जो बिना ड्राइविंग टेस्ट के फॉर्म को चतरा से अवैध उगाही करके “धनबाद” पहुंचा देते हैं. वहां बैठकर पैसे के बल पर नियमों को ताक पर रखते हुए लाइसेंस वाले दस्तावेज निर्गत कर दिए जाते हैं. शुक्रवार को अपने इसी योजना को अमली जामा पहनाने मोटर यान निरीक्षक अजय वर्मा अपने दलाल पप्पू पांडेय के साथ चतरा पहुंचे थे. लेकिन आज उनकी इस योजना पर लाभुकों ने पानी फेर दिया. स्थानीय लोगों ने ना सिर्फ दलाल को कार्यालय से भगा दिया बल्कि लोगों का विरोध को देखते हुए एमवीआई को भी मौके से रफूचक्कर होना पड़ा. लोगों के विरोध के बाद एमवीआई अपना काम छोड़कर करीब दो घंटोंं तक समाहरणालय स्थित भू अर्जन कार्यालय में दुबके रहे. लेकिन वहां भी लाभुकों ने पहुंच कर उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई. जिसके बाद वह पुणे परिवहन कार्यालय परिसर पहुंचे और करीब चार घंटे विलंब लाभुकों का ड्राइविंग टेस्ट लिया. 

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रुपया दो-लाइसेंस लो के तर्ज पर काम कर रहा डीटीओ कार्यालय

ड्राइविंग टेस्ट देने पहुंचे लाभुकों को धूप में घंटो अपने बारी का इंतजार करना पड़ा

डीटोओ कार्यालय में दलालों इस कदर हावी है कि बगैर पैसा दिए कोई भी काम नहीं होता है. चाहे वह ड्राइविंग लाइसेंस का काम हो या फिर वाहनों का पंजीयन व अन्य काम. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लागू किये गये ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया पर भी धनबल भारी पड़ रहा है. एक से डेढ़ हजार रुपया लेकर कार्यालय में सक्रिय दलाल आवेदकों को बगैर ड्राइविंग टेस्ट के सफल घोषित कराते हुए उन्हें आसानी से लाइसेंस व अन्य दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं. इन कार्यों को कार्यालय में कोई सरकारी कर्मी नहीं बल्कि मोटर यान निरीक्षक के तथाकथित एजेंट अंजाम दे रहे हैं. यह सारी कारगुजारी  जिला परिवहन पदाधिकारी  अनवर हुसैन के  कार्यालय से  नदारद रहने के कारण उत्पन्न हुई है. अनवर हुसैन  यदा कदा ही कार्यालय आते हैं वह भी चंद मिनटों के लिए। ऐसे में अगर अधिकारियों के कारगुजारियों की जांच हो जाए तो निश्चित तौर पर बड़ा हेरा फेरी उजागर होगा.

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मैं नहीं जानता पप्पू पांडेय को : एमवीआई

स्थानीय लोगों द्वारा हो हंगामा करने के बाद मौके से फरार हुए दलाल को अब मोटर यान निरीक्षक पहचानने से भी इंकार कर रहे हैं. अपनी गाड़ी में बिठाकर पप्पू को घुमाने वाले एमवीआई मामला बढ़ता देख  जांच की दुहाई देते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि मैं धनबाद से आता हूं पप्पू कौन है और क्या करता है मुझे नहीं पता. जबकि परिवहन विभाग के कर्मी पप्पू को एमवीआई का एजेंट बताकर उन्हें सरकारी दस्तावेज तक सौंप देते हैं.

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