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चतरा: टिकट नहीं मिलने से बागी हुए बीजेपी नेता राजेन्द्र साहु, निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव

नौ अप्रैल को दाखिल करेंगे पर्चा

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Chatra: काफी जद्दोजहद के बाद चतरा, रांची और कोडरमा इन तीन सीटों पर बीजेपी ने अपने प्रत्याशी की घोषणा की है. रांची, कोडरमा में जहां सीटिंग सांसद का टिकट कट गया, वहीं चतरा में सीटिंग सांसद सुनील सिंह अपनी टिकट बचाने में कामयाब रहे. बीजेपी ने एकबार फिर से उन्हें उम्मीदवार बनाया है.

लेकिन बीजेपी के ही कुछ नेताओं को ये फैसला नागवार गुजर रहा है. चतरा से बीजेपी के बड़े नेताओं में जाने जानेवाले राजेंद्र साहु के तेवर बागी दिख रहे हैं. पार्टी की ओर से टिकट नहीं मिलने से नाराज राजेंद्र साहु ने निर्दलीय ही चुनाव लड़ने की बात कही है.

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लातेहार जिला परिषद उपाध्यक्ष सह भाजपा नेता श्री साहू नामांकन के आखिरी दिन यानी 9 अप्रैल को निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष नामांकन प्रपत्र दाखिल करेंगे. उन्होंने बताया कि जनता के समर्थन से चुनाव में जा रहा हूं.

बीजेपी की बढ़ेगी मुश्किलें ?

चतरा लोकसभा से राजेन्द्र प्रसाद साहू के निर्दलीय चुनाव लड़ने की खबर से भाजपा में बेचैनी है. श्री साहू के चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा के सुनील सिंह की राह मुश्किल होते दिख रही है.

सूत्रों की मानें तो चतरा सांसद सुनील सिंह के रिपोर्ट कार्ड खराब होने के बावजूद भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट दिया है, जबकि क्षेत्र के कार्यकर्ता लगातार भाजपा से चतरा लोकसभा के लिए स्थानीय उम्मीदवार की मांग कर रहे थे. इस दौड़ में राजेन्द्र प्रसाद साहू भी उम्मीदवारों की फेहरिस्त में थे.

लेकिन अचानक केंद्रीय चुनाव समिति ने वर्तमान सांसद सुनील सिंह पर ही भरोसा जताया. उन्हें दोबारा चतरा लोकसभा से भाजपा का उम्मीदवार बनाया है.

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वैसे में क्षेत्र की जनता व कार्यकर्ताओं के स्थानीय उम्मीदवार की मांग को देखते हुए राजेन्द्र प्रसाद साहू भाजपा उम्मीदवार सुनील सिंह के विरुद्ध चुनावी शंखनाद करेंगे. कयास लगाए जा रहे हैं कि लातेहार में मजबूत पकड़ रखने वाले राजेन्द्र भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं.

महागठबंधन में भी पेंच

चतरा सीट पर मुकाबला काफी रोमांचक होनेवाला है. बीजेपी के साथ-साथ महागठबंधन में भी इस सीट को लेकर दरार है. महागठबंधन में वैसे तो ये सीट कांग्रेस के खाते में गयी थी.

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लेकिन आरजेडी ने इस सीट पर गठबंधन से अलग रूख अपनाते हुए सुभाष यादव को उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस की ओर से मनोज यादव को टिकट दिया गया है.

भले ही गठबंधन के घटक दल फ्रेंडली लड़ाई की बात करें, लेकिन चुनाव में फ्रेंडली फाइट जैसा कुछ नहीं होता, या तो जीत होती है या हार. अब इन बागी तेवरों के बीच चतरा सीट पर किसका परचम लहरायेगा ये तो 23 मई को ही पता चलेगा.

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