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चासनाला खान हादसा: सुपरवाइजर से लिया जा रहा था मजदूर का काम, माइनिंग सरदार और ओवरमैन थे गायब

Dhanbad : 22 मई की रात को चासनाला कोलियरी में हुए खान हादसा मामले में सेल प्रबंधन की भारी लापरवाही सामने आयी है. बताया जाता है कि महताब आलम, दुर्घटना में जिसकी मौत हुई थी, उससे वह काम करवाया जा रहा था जिसके बारे में वह कुछ जानता ही नहीं था.

महताब आलम सुपरवाइजर के पद पर था. उसका काम मजदूरों की देखरेख करना और यह सुनिश्चित करना था कि खदान में काम सुचारू रूप से चल रहा है या नहीं. बावजूद इसके उसको बंकर साफ करने के लिए खदान में भेजा गया था. जबकि बंकर साफ करने का काम माइनिंग सरदार की देखरेख में मजदूरों द्वारा किया जाता है.

दुर्घटना वाले दिन महताब आलम बंकर साफ करने गया था. वह बंकर साफ करना नहीं जानता था. इस दौरान कोयला भरभराकर उसके ऊपर गिर गया और उसमें दबकर उसकी मौत हो गयी.

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सेल की चासनाला कोलियरी में हरदम बनी रहती है दुर्घटना की आशंका

इस संबंध में चासनाला कोलियरी में काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि खदान के अंदर माइनिंग सरदार और ओवरमैन कभी जाते ही नहीं हैं. अप्रशिक्षित लोगों से भारी भरकम काम करवाया जाता है. जिससे यहां अक्सर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

मजदूरों ने बताया कि 1975 में भी इसी कोलियरी में भीषण खान हादसा हुआ था. जिसमें 375 मजदूरों ने जल समाधि ले ली थी. इस हादसे से भी सेल प्रबंधन ने कोई सीख नहीं ली. जिस कारण आये दिन इस कोलियरी में दुर्घटनाएं होती रहती हैं.

सेल प्रबंधन और ठेकेदार की मिलीभगत से बगैर सुरक्षा के करवाया जाता है काम

इस संबंध में असंगठित मजदूर नेता संजय सिंह ने बताया कि बिना सुरक्षा के ही सेल प्रबंधन और ठेकेदार की मिलीभगत से उनसे जबरन काम कराया जाता है. विरोध करने पर काम करने वाले मजदूरों को काम से हटा दिया जाता है.

अस्थाई मजदूर संघ के चासनाला कोलियरी अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि इस खदान में बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं. कभी किसी का पैर कटता है तो कभी किसी की उंगली कट जाती है. उन्होंने बताया कि काम के दौरान एक मजदूर की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है. जिस कारण वह दिव्यांग हो चुका है.

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पत्र लिखने के बाद भी नहीं की गयी कोई पहल

वहीं मजदूर नेता राजकुमार सिंह ने बताया कि ठेकेदार और सेल प्रबंधन की संलिप्तता से ऐसे मामले में लीपापोती की जाती है. समस्या का समाधान करने की दिशा में कोई पहल नहीं की जाती है.

उन्होंने बताया कि हमने सेल के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर यह सूचित किया था कि खदान की स्थिति बहुत ही जर्जर है. खदान में ओवरमैन, माइनिंग सरदार, मैनेजर कोई भी खान के अंदर नहीं जाते हैं. ये सब मिलकर मजदूरों का शोषण करते हैं.

पैसे के बल पर मैनेज किये जाते हैं अधिकारी

इस संबंध में मजदूर नेता सुदर्शन ओझा ने बताया कि  डीजीएमएस से लेकर सभी अधिकारियों को बार-बार पैसे की बदौलत मैनेज कर लिया जाता है. डीजीएमएस भी चुप हो जाते हैं, जिससे इतनी बड़ी दुर्घटना हुई.

खदान में कोई माइनिंग सरदार और ओवरमैन जाता नहीं है. यहां तक कि कोलियरी का मैनेजर भी खदान में नहीं जाता है. इस पूरे मामले में सेल के सीजीएम ने बताया कि खान के अंदर जो दुर्घटना हुई है, उसके लिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

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