Budget 2021JharkhandRanchi

बजट पर चार्टर्ड एकाउंटेट्स की प्रतिक्रियाः किसी ने कहा- निजीकरण की ओर ले जानेवाला तो किसी ने कहा- अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी

Ranchi : दी इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया, रांची शाखा में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के लिए बजट 2021 के लाइव प्रसारण देखने की व्यवस्था की गयी थी.

इस लाइव प्रसारण को एक साथ काफी संख्या में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने देखा और बजट सेसन के बाद इस बजट के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया रखते हुए सीए आरके गारोडिया ने कहा कि तत्काल इस बजट के बारे में कुछ कहना जल्दीबाजी होगी, क्योंकि सरकार ने इस बजट में सिर्फ देने की बात कही है, लेकिन पैसा कहां से आयेगा, यह बाद में पता चलेगा.‌

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सीए आरके कौशल ने कहा कि बजट में इंफ्रास्ट्रचर के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे रोजगार उत्पन्न होगा और देश की अर्थव्यस्था को तेजी भी मिलेगी. सीए संदीप जालान ने कहा कि टैक्स स्लैब में कोई बढ़ोतरी नहीं करने से नौकरीपेशा लोगों को निराशा हुई है.

सीए बिनोद बंका ने कहा कि इस बजट मे प्रस्तावित योजनाओं से देश की अर्थव्यस्था को तेजी मिलेगी.

इंस्टीट्यूट की रांची शाखा के उपाध्यक्ष सीए प्रवीण शर्मा ने कहा कि 75 वर्ष के अधिक उम्र वाले पेंशन भोगियों को रिटर्न में छूट देने एक बड़ी राहत है और स्वाथ्य सेवाओं के बजट को दोगुना करने से कोरोना से लड़ाई में देश को मदद मिलेगी.

सीए आशीष खोवाल ने कहा इस बजट में जीएसटी के सरलीकरण की अपेक्षा थी, लेकिन इस संबंध में कोई घोषणा नहीं हुई, जो निराशा उत्पन्न करती है.

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इंस्टीट्यूट के रांची शाखा के सचिव सीए प्रभात कुमार ने कहा कि इस बजट में कोरोना के कारण काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई. सरकार का जोर निजीकरण पर ज्यादा है.

सीए साकेत मोदी ने कहा कि आयकर को सरल बनाने का प्रयास नहीं किया गया है.

इंस्टीट्यूट के रांची शाखा के कोषध्यक्ष सीए पंकज मक्कड़ ने कहा कि इस बजट में साढ़े पांच लाख कैपिटल एक्सपेंडिचर की बात कही गयी है. साथ ही आधारभूत संरचना के लिए फंड आवंटित किया गया है.

लेकिन इसके लिए फंड कहां से आयेंगे इसका कोई जिक्र नहीं है. बजट में साढ़े पांच लाख करोड़ का कैपिटल व्यय की बात कही गयी है साथ ही आधारिक संरचना एवं रेल परियोजना के लिए के लिए फंड आवंटित किया गया पर इसके श्रोत को लेकर पूरी तरह जिक्र नहीं किया गया है.

आयकर सरल बनाने के लिए कुछ प्रयास किया गया है पर जैसी उम्मीद थी वैसा नहीं हो पाया है. निजीकरण के तहत कई चीजों को प्राइवेट करने की बात की गयी है जैसे एलआईसी का आईपीओ. कोरोना को लेकर जैसे वित्तीय सहयोग की उम्मीद थी वैसा नहीं रहा.

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