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कृत्रिम अंग से दिव्यांग जनों के जीवन में आ रहा बदलाव

जयपुर फुट नि:शुल्क उपलब्ध कराती कृत्रिम अंग, एक साल में 1500 लोगों को मिला लाभ 

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Ranchi: कृत्रिम हाथ व पैर, दिव्यांगों के जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं. वैसे दिव्यांग जो अपने पांव पर ठीक से चल नहीं पाते, उनके लिए ये कृत्रिम पैर एवं कैलिपर जीवन का सहारा है. जिसके इस्तेमाल से दिव्यांग ना सिर्फ बेहतर ढंग से चल पाते हैं, बल्कि अपने रोजमर्रा के काम के लिए आत्मनिर्भर भी हो पाते हैं. जयपुर फुट नामक संस्था द्वारा दिव्यांग लोगों को नि:शुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया जा रहा है. यह संस्था लगभग एक साल से इस दिशा में काम कर रही है. संस्था के डॉ. एचके साहू ने बताया कि अबतक लगभग 1500 से भी अधिक दिव्यांग युवक-युवतियों को की मदद संस्था ने की है.

रांची में यह संस्था निरामया हॉस्पिटल के साथ मिलकर कृत्रिम अंग लगाने का काम करती है. डॉ साहू बताते है कि अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से हम लोग दिव्यांग बच्चों, युवक और युवतियों तक पहुंचते है, इसके अलावा सोशल मीडिया और जागरुकता कैंप द्वारा भी ऐसे लोगों की खोज की जाती है. कृत्रिम अंग लगने के बाद कुछ दिन थोडी परेशानी होती है लेकिन धीरे-घीरे जीवन सामान्य हो जाता है.

जयपुर से आते हैं पार्ट्स, यहां होता है इंस्टॉल

डॉ एचके साहू ने बताया कि कृत्रिम अंगों के लिए जयपुर से पार्ट्स आते हैं. इसका इंस्टॉलेशन रांची में ही किया जाता है. उन्होंने बताया कि दिव्यांगता देखने के बाद उसकी माप ली जाती है, इसके पश्चात कृत्रिम अंग तैयार किया जाता है. इसी अंगों को खुद से लगाने में 15 से 35 हजार रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन संस्था सबकुछ मुफ्त उपलब्ध कराती है. इसके साथ ही डॉक्टरों की परामर्श भी दी जाती है. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को इसकी जरुरत हो तो वे 7004604163 पर संपर्क कर सकते हैं.

20 दिव्यांग जनों को दिया गया कृत्रिम अंग

रविवार को भी एक कैंप का आयोजन किया गया था. इस कैंप का आयोजन मारवाड़ी सहायक समिति द्वारा किया गया था. इसमें 20 दिव्यांग जनों को कृत्रिम पांव, कैलिपर आदि दिया गया. खूंटी से आयी कैरी टुटी ने बताया कि जब वे दो साल की थी तो ट्रेन की चपेट में आकर उनका पैर कट गया. इसके बाद से जिदंगी एक पांव पर ही कट रही है. अब लेकिन कृत्रिम पांव लगने से जीवन में थोड़ा बदलाव जरुर आयेगा.

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