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RTI में बदलाव से भ्रष्टाचारियों को सार्वजनिक जांच से बचने का मिलेगा मौकाः सूचना आयुक्त

 श्रीधर आचार्युलू ने मुख्य सूचना आयुक्त को लिखा पत्र

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NewDelhi: न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा समिति की ओर से आरटीआई कानून के निजता प्रावधान में जो परिवर्तन सुझाये गए हैं उससे भ्रष्ट अधिकारियों को सार्वजनिक जांच से बचने का मौका मिलेगा. यह बात एक सूचना आयुक्त ने कही है.

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सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने मसौदा निजी डेटा संरक्षण विधेयक, 2018 में प्रस्तावित परिवर्तन को अवांछित बताते हुए मुख्य सूचना आयुक्त आर के माथुर और अन्य सभी आयुक्तों को पत्र लिखकर सिफारिशों पर चर्चा करने और सूचना के अधिकार की रक्षा के वास्ते इसके विरोध में रुख अपनाने की अपील की है.

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मसौदा विधेयक सरकार की ओर से न्यायमूर्ति बी एच श्रीकृष्णा समिति के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों पर आधारित है. आचार्युलू ने सभी आयुक्तों के बीच प्रसारित एक परिपत्र में कहा कि हमें इस बात पर जोर देने की जरूरत है कि आरटीआई कानून के प्रावधानों में संशोधन के किसी भी प्रस्ताव पर जनता और विशेष तौर पर सूचना आयुक्तों के बीच व्यापक चर्चा के बिना विचार नहीं किया जाए.

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मसौदा विधेयक में RTI की धारा 8(1) (जे) में संशोधन की बात

आरटीआई कानून की धारा 8(1) (जे) ऐसी सूचना के खुलासे से छूट देता है जो निजी सूचना से संबंधित है जिसके खुलासे से किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित का कोई संबंध नहीं है या जिससे व्यक्ति के निजता का अवांछित उल्लंघन होगा, जब तक कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या अपीलीय प्राधिकार जैसा भी मामला हो, इससे संतुष्ट न हो कि ऐसी सूचना के खुलासे में व्यापक जनहित है. आचार्युलू ने कहा कि निजी डेटा की प्रस्तावित परिभाषा बहुत व्यापक, अस्पष्ट विस्तृत और असीमित है.

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उल्लेखनीय है कि इस मामले पर सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सूचना आयुक्तों को पत्र लिखा था. उन्होंने कहा था कि ये संशोधन सूचना आयोगों को कमजोर कर देगा. उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त से गुजारिश की कि वे सरकार से आधिकारिक रूप से कहें कि सूचना का अधिकार कानून में संशोधन का प्रस्ताव वापस लिया जाए.

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