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सदन में हंगामा के बाद बैकफुट पर सरकार, बदले गये जेपीएससी सचिव

मुख्य सचिव से वार्ता के बाद जेपीएससी मुख्य परीक्षा को रद्द करने पर फैसला लेगी सरकार

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Ranchi:  विधानसभा में जेपीएससी मुख्य परीक्षा स्थगित करने और जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर विधायकों ने गंभीर सवाल खड़े किये. इसके बाद सरकार बैकफूट पर है. जेपीएससी के सचिव बदल दिये गये हैं. रणेंद्र कुमार को जेपीएससी सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. जेपीएससी के वर्तमान सचिव जगजीत सिंह ने सरकार को पीत पत्र के माध्यम से खुद को परीक्षा प्रक्रिया से दूर रखने की मांग की थी. बताया था कि मेरे पुत्र भी इस परीक्षा में भाग ले रहे हैं. जिसके बाद भी उन्हें नहीं हटाया गया था. इसके बाद विपक्ष के विधायकों ने इस बात को लेकर खूब हंगामा किया था. हंगामा के दौरान सदन में विधायकों ने सवाल भी उठाये थे और कहा था कि आखिर किस मजबूरी के तहत सचिव को पद पर अभी तक बनाये रखा गया है. इसके अलावा सीमा देवी ने भी मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के माध्यम से ये सवाल किया था कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठता है. सरकार कब उन्हें कब पद से हटायेगी. इसके बाद मंगलवार शाम को कार्मिक ने अधिसूचना जारी करते हुए सचिव जगजीत सिंह को स्थानांतरित करते हुए गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव के पद पर पदस्थापित किया है. जबकि रणेंद्र कुमार को जेपीएससी सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है.

विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी चाहते हैं रद्द हो जेपीएससी परीक्षा

जेपीएससी की होने वाली मुख्य परीक्षा को लेकर मंगलवार को फिर एक बार विधानसभा में गंभीर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष के विधायक और विपक्ष दोनों चाहते हैं कि जेपीएससी की छठी मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी जाये.  इसे लेकर विधायकों ने अपने तर्क भी रखे. कमियां और त्रुटियों को गिनाते हुए कई सुझाव भी दिये. बताया गया कि विधानसभा के माध्यम से ही परीक्षा हो स्थगित कराया जा सकता है. सरकार इस संबंध में फैसला ले सकती है. पर सरकार के जवाब और रवैये से कहीं से भी नहीं लगा कि सरकार मुख्य परीक्षा रद्द करने को लेकर कोई मंशा रखती है. भाजपा विधायक राधाकृष्ण किशोर, शिवशंकर उरांव सहित विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन, झाविमो के प्रदीप यादव, कांग्रेस के सुखदेव भगत और गीता कोड़ा  के अलावा विधायक भानुप्रताप शाही, कुणाल षाडंगी, सीमा देवी सभी ने जेपीएससी मुख्य परीक्षा रद्द करने की मांग के साथ अपने तर्क भी रखे.

जवाब नहीं मिलने पर विधायकों ने जताया रोष 

विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने जेपीएससी की चर्चा के दौरान कहा कि अगर सदन में इतने गंभीर विषयों पर चर्चा होने के बाद भी समाधान नहीं आयेगा, तो फिर चर्चा का क्या फायदा. सरकार तुरंत परीक्षा स्थगित करे. साथ ही कहा कि सरकार अपनी विफलता को कब तक छिपा कर रखेगी. वहीं प्रदीप यादव ने कहा कि सदन में बात आने के बाद भी सरकार अगर गंभीर नहीं होगी तो कहां होगी. नीलकंठ मुंडा ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार कोर्ट के आदेश के बाद ही इसमें हस्तक्षेप करेगी. इसके बाद हेमंत ने सुझाव देते हुए कहा कि सरकार कोर्ट में इंटरवेनर बनकर हस्तक्षेप कर सकती है. जिसके बाद स्पीकर दिनेश उरांव ने सरकार को 11.45 में जवाब देने को कहा.

सरकार बताये कोर्ट में मामला होने के बाद कैसे सरकार ले रही है परिक्षाः राधाकृष्ण किशोर 

नीलकंठ सिंह मुंडा ने 11.45 में जवाब देते हुए बताया कि एसटी, एससी, और ओबीसी को न्यूनतम अंक के आधार पर पास कर दिया गया है. जिससे छात्रों की संख्या बढ़ गयी है. अभी मामला कोर्ट में है. उसके बाद ही सरकार जवाब देगी. सत्तापक्ष के विधायक राधाकृष्ण किशोर ने जवाब के बाद पूछा कि अगर मामला कोर्ट में है तो परीक्षा कैसे हो रही है. उन्होंने सवाल किया कि जब यूपीएससी की पीटी परीक्षा में आरक्षण मिलता है, सरकार खूद चार जेपीएससी में आरक्षण दे रही है, तो फिर ये कैसे हो सकता है. शिवशंकर उरांव ने पूछा कि जनता की अदालत की अहमियत ज्यादा है या कोर्ट की. कहा कि सरकार मामले पर फैसला ले सकती है और परीक्षा को स्थगित कर सकती है. अंत में सीएम ने बताया कि कार्मिक के सचिव और मुख्य सचिव से वार्ता कर इस मामले में सरकार कोई फैसला लेगी.

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