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चंदनकियारीः गठबंधन वाली आजसू और बीजेपी के बीच हो रही खस्सी और बॉलीवुड ग्लैमर वाली राजनीति

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Divy Khare/Akshay Jha

Bokaro: वैसे तो आजसू और भाजपा पूरे राज्य में अपने गठबंधन की बात कर रहे हैं. लेकिन अगर इनके बीच सीट को लेकर हो रही लड़ाई देखनी है तो बोकारो के चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र में देखिए.

आपस के कॉम्पटीशन के चक्कर में वोटरों के लिए इंटरटेनमेंट से लेकर भोज तक का इंतजाम किसी न किसी बहाने से इन दोनों पार्टियों के नेताओं के द्वारा किया जा रहा है.

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कहीं महोत्सव-कहीं फुटबॉल मैच

जनता को भी इस रोमांचक मुकाबले में मजा आ रहा है. जहां आजसू के भूतपूर्व विधायक उमाकांत रजक खस्सी-पाठा बांटते दिख रहे हैं. वही चंदनक्यारी विधायक और राज्य के टूरिज्म मंत्री अमर बाउरी महोत्सव करा देश के नामचीन सिंगर जैसे दिलेर मेहंदी, ममता शर्मा इत्यादि को क्षेत्र में परफॉर्मेंस करवा रहे हैं.

यहां आजसू और भाजपा के बीच की लड़ाई करीब पांच साल पहले से शुरू हुई है. चंदनक्यारी क्षेत्र में 2014 विधानसभा चुनाव तक एनडीए के घटक दलों में सिर्फ आजसू चुनाव लड़ती थी.

पिछली बार के विधानसभा चुनाव में आजसू और जेवीएम के बीच के टक्कर हुई थी. जिसमें बाउरी जो उस समय झाविमो के प्रत्याशी थे आजसू के उमाकांत को हरा कर विधायक बने.

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लेकिन कुछ ही दिन बाद अमर बाउरी अन्य पांच विधायकों के साथ भाजपा ज्वाइन कर ली. अब स्थिति यह है कि जहां भाजपा चंदनक्यारी में अपनी सीट को लेकर दावेदारी कर रही है. वही आजसू अपनी सीट को छोड़ने को एकदम तैयार नहीं है. ऐसे में आपसी मतभेद बढ़ा है.

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खस्सी और बॉलीवुड का तड़का

दोनों विधायक चंदनक्यारी की जनता को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं. विधानसभा चुनाव के पहले अचानक चंदनक्यारी क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर फुटबॉल मैच होने शुरू हो गए हैं. जिसमें उमाकांत रजक मुख्य अतिथि के रूप में खिलाड़ियों के बीच खस्सी बांटते दिख रहे हैं.

जीतने वाली टीम को बड़ा खस्सी और हारने वाली टीम को छोटा खस्सी. युवा काफी खुश हैं जीतो या हारो खस्सी तो मिलना ही है.

वैसे भी चंदनक्यारी क्षेत्र में मानशो-भात (मटन चावल) का कल्चर बहुत पुराना है. पिछले एक हफ्ते में ऐसे तीन फुटबॉल मैचों का आयोजन हुआ जहां उमाकांत रजक ने जाकर खिलाड़ियों को खस्सी और ट्रॉफी दी.

पूछने पर उमाकांत रजक जी का कहना है यह तो आयोजक खस्सी देते है जिसे वह मुख्य अतिथि के रूप में जाकर खिलाड़ियों को देकर उनको प्रोत्साहित करते हैं, ताकि वो अच्छे खिलाड़ी बन क्षेत्र का नाम रोशन करें.

उमाकांत रजक के अनुसार, वह किसी पॉलिटिकल एजेंडे के चलते ऐसा नहीं कर रहे हैं. वह यह भी कहते हैं कि जैसे अमर बाउरी ने पानी की तरह जनता का पैसा महोत्सव का आयोजन कर बहाया है.

उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी. करोड़ों खर्च कर आयोजित हुए भैरव महोत्सव से बढ़िया था कि वह भैरव स्थान का उसी पैसों से विकास कर देते.

लाखों खर्च कर बाहर के कलाकारों जैसे दलेर मेहंदी इत्यादि को लाकर उन्होंने क्या विकास कर दिया. इससे बढ़िया था कि झारखंड के पारंपरिक लोकगीत और नृत्य को बढ़ावा दिया जाता.

जबकि झारखंड सरकार ने भैरव महोत्सव का आयोजन कुछ दिन पहले चंदनक्यारी के पोल्करी स्थिति भैरव स्थान, जो कि एक धार्मिक स्थल है और उससे काफी मान्यतयाएं जुड़ी हुई है, को राष्ट्र के टूरिज्म मैप पर लाना था. वो नहीं हुआ.

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