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चांद सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता

गीतकार प्रसून जोशी के जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : वर्ष 2006 में आमिर खान और काजोल के लीड रोल वाली फिल्म आई थी फना. इस फिल्म में आमिर एक आतंकवादी का किरदार निभा रहे थे. ये फिल्म उस वर्ष की बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हुई थी. इसके गाने भी खूब चले थे. मुझे इस फिल्म का सबसे पसंदीदा गीत शान और कैलाश खेर का गाया हुआ गीत ‘चांद सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता’ लगता है.

इस गीत में प्रसून जोशी की कलम का तो कमाल नजर आता ही है. इसका फिल्मांकन भी बेहद खूबसूरत ढंग से हुआ है. आमिर और काजोल खूब जंचे हैं. इसमें जतिन – ललित का सुरीला संगीत चार चांद लगा देता है.

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इस फिल्म का एक और गीत भी बेहद रोमांटिक है’ मेरे हाथ में तेरा हाथ हो, सारी जन्नतें मेरे पास हों’. इस गाने को सोनू निगम और सुनिधि चौहान ने बड़े प्यार से गाया है. एक और गीत ‘चंदा चमके चम चम भी हिट हुआ था.

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अल्मोड़ा की खूबसूरत वादियों में हुआ जन्म

प्रसून जोशी का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के दन्या गाँव में हुआ था. उनके पिता देवेन्द्र कुमार जोशी सरकारी अधिकारी थे. मां सुषमा जोशी और पिता दोनों की संगीत में रूचि थी.

उनका बचपन एवं उनकी प्रारम्भिक शिक्षा टिहरी, गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली एवं नरेन्द्रनगर में हुई.अल्मोड़ा की खूबसूरत वादियों में जन्म लेने और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य को शिद्दत से महसूस करने और उसे अपने गीतों में खूबसूरत अंदाज में पेश करने में भी प्रसून सफल रहे हैं.

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महज 17 साल की उम्र में पहली किताब ‘मैं और वो’

मात्र 17 साल की उम्र में उनकी पहली किताब ‘मैं और वो’ प्रकाशित हुई थी. इन्होने फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद एमबीए किया. करियर की शुरुआत दिल्ली की एड कंपनी O&M (Ogilvy and Mather) से की थी.

इसके बाद वो अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी ‘मैकऐन इरिक्सन’ से जुड़े और उसके कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे. उनके कुछ विज्ञापनों के पंचलाइन ने उन्हें काफी शौहरत दिलाई.

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उनकी लिखी ये पंचलाइन सुपर हिट हुईं

  • ठंडा मतलब कोका कोला
  • क्लोरमिंट क्यों खाते हैं? दोबारा मत पूछना
  • ठंडे का तड़का… यारा का टशन
  • अतिथि देवो भव:
  • उम्मीदों वाली धूप, सनसाइन वाली आशा. रोने के बहाने कम हैं, हंसने के ज़्यादा.

लज्जा फिल्म से शुरू हुआ गीतों का सफर

विज्ञापन की दुनिया में धूम मचाने के बाद प्रसून ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा. फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘लज्जा’ उनकी गीतकार के रूप में पहली फिल्म थी. इसमें इन्होंने सिर्फ एक गीत ‘कौन डगर कौन सफर’ लिखा था.

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रंग दे बसंती से चढ़ा प्रसून का रंग

गीतकार के रूप में प्रसून जोशी के नाम का डंका फिल्म निर्माता व निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म रंग दे बसंती के गीतों से बजा. आमिर खान, माधवन, सोहा अली खान की यह फिल्म एक अलग अंदाज में बनाई गई थी.

कॉलेज के युवाओं के किरदारों को लेकर बनी फिल्म में प्रसून ने युवा पीढ़ी की ही जुबान में गाने लिखे थे. इसका एक गाना तो ऐ साला शब्द से शुरू होता है लेकिन जब गाना आगे बढ़ता है तो अर्थपूर्ण हो जाता है.

ए साला
अभी अभी हुआ यकीन
की आग है मुझ में कहीं
हुई सुबह मैं चल गया
सूरज को मैं निगल गया
रूबरू रौशनी हे – 2
जो गुमशुदा सा ख्वाब था
वोमिल गया वो खिल गया
वह लोहा था पिघल गया
किच्छा किच्छा मचल गया
सितार में बदल गया
रूबरू रौशनी हे
धुंआ छटा खुला गगन मेरा
नयी डगर नया सफ़र मेरा
जो बन सके तू हमसफ़र मेरा
नज़र मिला ज़रा
धुंआ छटा खुला गगन मेरा
नयी डगर नया सफ़र मेरा
जो बन सके तू हमसफ़र मेरा
नज़र मिला ज़रा
आँधियों से जग
रही है लौ मेरी
अब मशालों सी बढ़
रही है लौ मेरी
नामो निशाँ रहे न रहे
ये कारवां रहे न रहे
उजाले में पी गया
रोशन हुआ जी गया
क्यों सहते रहे
रूबरू रौशनी हे
धुंआ छटा
खुला गगन मेरा
नयी डगर नया सफ़र मेरा
जो बन सके तू हमसफ़र मेरा
नज़र मिला ज़रा
रूबरू रौशनी हे 2
ए साला – 3.

इस गीत को नरेश अय्यर ने गाया था. नरेश अय्यर और मो असलम का गाया हुआ गाना अपनी जो पाठशाला ने भी युवाओं में धूम मचा रखी थी. दलेर मेहंदी व चित्रा केएस का गाया हुआ टाइटल सांग ‘ मोहे रंग दे बसंती’ भी काफी लोकप्रिय हुआ था. रहमान के गाए गाने ‘खलबली है खलबली’ ने भी खलमचा दी थी.

इन धमाकेदार गीतों के साथ-साथ लता की मधुर आवाज में ‘लुका-छिपी बहुत हुई अब सामने आजा’ दिल की गहराई में उतर जाता है. वहीं मधुश्री और नरेश अय्यर का गाया हुआ गाना ‘ तुम बिन बताए मुझे ले चल कहीं’ भी मधुर गीत है.

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तारे जमीन पर, प्रसून आसमान पर

वर्ष 2007 में आमिर खान और दार्शिल सफारी के लीड रोल वाली एक अच्छी व अलग सब्जेक्ट पर बनी फिल्म आई थी ‘तारे जमीन पर’. निर्देशक अमोल गुप्ते की इस फिल्म में ‘ मैं कभी बतलाता नहीं क्या.. तुझे सब पता है ना मां जैसा मार्मिक गीत प्रसून ने लिखा था. इसे गाया था शंकर ने.

इस गीत के लिए प्रसून को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था. इस फिल्म में शान का गाया हुआ एक मस्ती भरा गीत भी था’ बम बम बोले मस्ती में डोले ‘ फिल्म का टाइटल सांग भी हिट हुआ था.

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राकेश ओमप्रकाश मेहरा के फेवरेट

फिल्म निर्माता व निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ रंग दे बसंती में प्रसून की जोड़ी ऐसी बनी जो आगे भी कई फिल्मों में बनी रही. भाग मिल्खा भाग और दिल्ली – 6 में प्रसून ने खूबसूरत गगीत लिखे थे.

ससुराल गेंदा फूल

दिल्ली – 6 में रेखा भारद्वाज का गाया हुआ गीत ‘ सैंया छेड़ देवे ननद चुटकी लेवे.. ससुराल गेंदा फूल’ ने धमाल मचा दिया था. शादी ब्याह के मौके पर तो ये सबसे पसंदीदा गीत बन गया था. वहीं मोहित चौहान के गाए अलग अंदाज के गाने ‘ मस्सकली मस्सकली’ भी लोगों की जुबान पर चढ़ गया था. रहना तू है जैसे तू भी अच्छा गाना था. मौला मौला गीत भी चला था.

प्रसून भले ही बाजार के लिए लिखते हों लेकिन उनके द्वारा समय समय पर सामयिक व ज्वलंत मुद्दों पर लिखी गई कविताओं में आमलोगों की संवेदना होती है. चाहे वह लड़कियों-महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर लिखा हो या फिर मुंबई आतंकी हमले के बाद लिखी गई उनकी कविता. पाकिस्तान के पेशावर के स्कूल में होने वाले आतंकी हमले के बाद लिखी गई उनकी पंक्तियां पूरी दुनिया में काफी सराही गईं थी.

प्रसून को गुलजार बहुत पसंद हैं और मुझे भी. उनके लेखन में भी गुलजार का असर दिखता है. लेकिन प्रसून अपने गीतों में नए प्रतीकों व बिंबों का बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल करते हैं. वे इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि उनके गीतों में खालिस ऊर्दू के ही शब्द ना हों जहां जरूरत लग अंग्रेजी के शब्दों का भी धड़ल्ले से प्रयोग करते हैं. वो नई पीढ़ी के टेस्ट को भी बखूबी पहचानते हैं इसलिए उनके गीत युवाओं में भी बेहद लोकप्रिय होते हैं.

उनके गीतों के 3 प्राइवेट एल्बम भी जारी हुए हैं में डूबा डूबा रहता हूं सिल्क रूट अब के सावन शुभा मुद्गल 99 तथा मन के मंजीरे शुभा मुद्गल शामिल है.

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इन अवार्ड से हुए सम्मानित

  • 2002: विज्ञापन जगत का ABBY अवॉर्ड
  • 2003: कान्स लॉयन अवॉर्ड
  • 2005: ‘सांसों को सांसों’ गाने के लिए स्क्रीन अवॉर्ड
  • 2007: चांद सिफारिश गाने के लिए फ़िल्मफेयर अवॉर्ड
  • 2008: ‘मां’ गाने के लिए
  • 2013: फ़िल्म ‘चिटगॉन्ग’ के गीत ‘बोलो ना’ के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
  • 2014: फ़िल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ के गाने ‘ज़िंदा है तो प्याला पूरा भर ले’ के लिए फिल्मफेयर
  • 2015: फ़िल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ के लिए बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड
  • 2015: पद्मश्री पुरस्कार
  • प्रसून 2017 में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष बने

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ये हैं उनके यादगार गीत

  • गुस्ताखियां है बेताबियां हैं :आंखें (02)
  • सपना हो या सच हो लव ए टाइम स्क्वायर (02)
  • तेरी एक नजर से जिंदगी निहाल हो गई : थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक (03)
  • बादलों की ओट में चांद छुपा क्यों : क्यों (03) भूपेन हजारीका – आशा भोंसले, भूपेन हजारीका
  • लड़कियां न जाने क्यों लड़कों सी नहीं होती :हम तुम (04)
  • सांसों को सांसों से मिलने दो जरा : हम तुम (04), अलका-बाबुल सुप्रियो
  • खुल कर मुस्कुरा ले तो दर्द को शरमाने दे: फिर मिलेंगे (04)
  • खुशियों की कोशिश में हर दिन झमेला है : फिर मिलेंगे (04), महालक्ष्मी- श्रीनिवास, शंकर एहसान लॉय
  • जीने के इशारे मिल गए : फिर मिलेंगे (04), शंकर महादेवन, शंकर – एहसान- लॉय
  • जाने किसे पुकारे दिल मेरा : रोक सको तो रोक लो (04)
  • हां मैंने छू कर देखा है : ब्लैक (05)
  • मौसम की अदला-बदली में : ब्लैक (05)
  • कैसे मुझे तुम मिल गई :- गजनी (08) बेनी दयाल
  • तू मेरी अधूरी प्यास प्यास है गुजारिश : गजनी (08) जावेद अली या रहमान
  • प्यार के लिए : थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक (08) शंकर महादेवन, शंकर एहसान लॉय
  • हिम्मतें अता करो ओ मददगार मौला : कुर्बान(09)
  • जो तुझे जगाए ख्वाब जो राग दे : लंदन ड्रीम्स (09)
  • मन को अति भावे सैयां मन गाए रे हाय रे : लंदन ड्रीम्स,(09) शंकर, शंकर – एहसान – लॉय
  • धूप के सिक्के जिंदगी को बहने दो : सिकंदर (09) शंकर- अनुष्का, शंकर,-एहसान – लॉय
  • धूप के सिक्के उठाकर गुनगुनाते दो उसे : सिकंदर (09) शंकर महादेवन – अनुष्का, शंकर- एहसान – लॉय
  • सुकरानल्ला नजरों से नजरें मिली तो :कुर्बान (09) सोनू- सलीम – श्रेया, सलीम – सुलेमान
  • ओ रसिया : कुर्बान (09), श्रुति पाठक, सलीम- सुलेमान
  • धूप के मकान सा है यह सफर : ब्रेक के बाद (10)
  • दूरियां भी है जरूरी : ब्रेक के बाद (10),विशाल- मोनिका ,विशाल शेखर
  • मैं जिऊंगा : ब्रेक के बाद(10), निखिल डिसूज़ा, विशाल शेखर
  • धूप के मकान सा है यह सफर :ब्रेक के बाद(10), सुनिधि, शेखर रवजियानी, कारलिया
  • कौन सी डोर खींचे, कौन सी कांटे रे : आरक्षण(11)
  • श्रेया- चन्नूलाल मिश्रा, शंकर- एहसान- लॉय
  • पंख खोलो और फिर उड़ान देखना : आरक्षण (11)
  • बरस रही हो रोशनी दीवारें तोड़कर : आरक्षण: (11), शंकर महादेवन, शंकर – एहसान- लॉय
  • झटक कर जुल्फ जब तुम…. अच्छा लगता है : आरक्षण (11), श्रेया – मोहित चौहान, शंकर- एहसान- लॉय.
  • हमारी अटरिया पर आ इयो बलमजी : (13), सत्याग्रह श्रद्धा पंडित -सलीम, सलीम- सुलेमान
  • रस के भरे तोरे नैन सांवरिया : सत्याग्रह (13),अर्पिता चक्रवर्ती
  • मेरा यार है रब वरगा : भाग मिलखा भाग (13)
  • फॉरेन बलमवा : मार्गरेटा विद स्ट्रॉ (15) सोनू कक्कड़ निक्की मैक क्लेरी
  • मेरी आदत मेरा हिस्सा कट गया : मार्गरेटा विद स्ट्रॉ (15) अनुष्का मनचंदा
  • जीते हैं चल : नीरजा (16) कविता सेठ, विशाल खुराना
  • खुशबू खुशबू महक का इश्क : नीरजा (16),शेखर रवजियानी विशाल खुराना
  • बेचैन हैं सपने आसमान बुलाए : महालक्ष्मी – अभिजीत सावंत, शंकर – एहसान- लॉय
  • मुमकिन है : सत्यमेव जयते टीवी धारावाहिक, राम संपत
  • मौसम गुलाल लेकर दरवाजे पर तेरे आए : सपना देखा है मैंने (07), शुभा मुद्गल
  • आशा वाली धूप की उम्मीदों है : जाकिर हुसैन, अली अजमत, उस्ताद सुल्तान खान, तौफीक, शंकर महादेवन,
  • शंकर – एहसान- लॉय
  • बैरी चैन : अब के सावन (99), शुभा मुद्गल, शांतनु मोइत्रा
  • बोले कब प्रतिकार करोगे : मणिकर्णिका ( 19),सुखविंदर सिंह ,शंकर एहसान लॉय
  • मैं रहूं या ना रहूं भारत ये रहना चाहिए : मणिकर्णिका. ( 19), शंकर महादेवन
  • नैना चुगलखोर राजा जी : मणिकर्णिका प्रतिभा सिंह बघेल रवि मिश्रा, शंकर एहसान लॉय
  • टकटकी निहारू रे : मणिकर्णिका प्रतिभा सिंह बघेल

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