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हाथी को साथी बनाना वन विभाग की चुनौती, अबतक 1200 लोगों की गयी जान

हाथियों के भ्रमण के लिये नहीं बन पाया कॉरिडोर, रेसक्यू सेंटर भी नहीं बना

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Ranchi:  हाथी को साथी बनाना वन विभाग के लिये चुनौती बन गयी है. उग्र हाथियों द्वारा प्रदेश में आये दिन लोगों पर हमला जारी है. वन विभाग के लिये यह एक बड़ी चुनौती बन गयी. कुछ दिन पहले ट्रेन से कटकर तीन हाथियों की मौत हो गयी थी. वहीं हाथी जानमाल सहित फसल और घरों को भी क्षति पहुंचा रहे हैं. वन विभाग की रेसक्यू टीम भी इसे रोकने में अबतक सफल नहीं रही है. राज्य गठन के बाद से अब तक हाथियों के हमले से 1200 लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं.

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योजनाएं तो बन रही हैं पर कारगर नहीं

हाथियों पर काबू पाने के लिये वन विभाग योजनाएं तो बना रहा है लेकिन वह कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं. हाथियों के भ्रमण के लिये कॉरिडोर (एक प्राकृतिक स्थल से दूसरे प्राकृतिक स्थल तक) तैयार किया जाना था. इसके लिये जीआइएस मैपिंग भी हुई. लेकिन यह कॉरिडोर अब तक नहीं बन पाया है. राज्य के अंदर पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, गिरिडीह और दुमका में कॉरिडोर बनाना था. वहीं अंतरराज्यीय कॉरिडोर उड़ीसा-चाईबासा, उड़ीसा- सारंडा, पूर्णिया-दलमा और सरायकेला- बंगाल में बनाया जाना था.

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एलिफेंट रेसक्यू सेंटर भी नहीं बना

राज्य गठन के बाद से हाथियों के लिये एलिफेंट रेसक्यू सेंटर भी नहीं बन पाया. धनबाद के वन क्षेत्र और दलमा में रेसक्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव था. वन विभाग के अनुसार, एक हाथी दो से पांच वर्ग किलोमीटर में भ्रमण करता है. इस हिसाब से धनबाद का वन क्षेत्र रेसक्यू सेंटर के लिये उचित नहीं है.

क्या होता रेसक्यू सेंटर में

हाथियों की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता
पूरे एरिया की फेंसिंग होती
खाने और पीने का इंतजाम होता.
हाथियों की सुरक्षा का इंतजाम होता

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क्यों भटक रहे हैं हाथी

हाथियों के पुनर्वास का है अभाव
हाथियों के भ्रमण का बदल गया है रास्ता
छोटे-छोटे पैकेज में जंगल होने के कारण भटक रहे हैं हाथी

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