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चक्रधरपुर: महिलाओं ने संभाली ट्रेन परिचालन की कमान, सरपट दौड़ पड़ी साउथ बिहार एक्सप्रेस

Chakradharpur : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चक्रधरपुर रेल मंडल प्रशासन ने साउथ बिहार एक्सप्रेस को चक्रधरपुर से राउरकेला स्टेशनों के बीच महिला स्पेशल ट्रेन बना कर चलाया. चक्रधरपुर स्टेशन का नजारा बदला बदला सा नजर आया. न सिर्फ चक्रधरपुर स्टेशन की कमान महिलाओं के हाथ सौंपी की गयी, बल्कि चक्रधरपुर स्टेशन से राउरकेला स्टेशन तक साउथ बिहार एक्सप्रेस को महिला स्पेशल ट्रेन बनकर रवाना किया गया । इस ट्रेन में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड, टीटीई समेत आरपीएफ के जवान सभी रेल कमर्चारी महिलाएं थीं. कल तक जिस ट्रेन में पुरुषों का वर्चस्व कायम था आज उस ट्रेन का सफल परिचालन कर महिलाओं ने अपने दमखम और आत्मविश्वास का परिचय दिया.

शिला रानी होरो लोको पायलट ने चलाया साउथ बिहार एक्सप्रेसरू
ट्रेन नंबर 13288 राजेंद्रनगर दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस को महिला स्पेशल ट्रेन बनाया गया था. चक्रधरपुर से लेकर राउरकेला स्टेशन तक चली इस महिला स्पेशल ट्रेन की मुख्य चालक शिला रानी होरो थीं, जबकि सहायक चालक सोनाक कुमारी हांसदा थीं. गार्ड की कमान श्रावन्ति पांडेय ने संभाली तो डिप्टी सीटीआई टीटीई सचिम खातून, सम्पा चौधरी, सीनियर टीटीई एम कलुण्डिया, सुमित्रा तिर्की की महिला टीम ने ट्रेन में यात्रियों की टिकट जांच की. वहीं साउथ बिहार एक्सप्रेस में यात्रियों की सुरक्षा में आरपीएफ महिला सब इंस्पेक्टर एस मंडी, कान्स्टेबल बसवा बरला, केएम रीना, रुपाली बिस्वास, पिंकू घोराई ट्रेन में तैनात थी. यही नहीं स्टेशन में भी स्टेशन मैनेजर मीणा सत्पथी ने पूरे स्टेशन में महिला कर्मियों की फौज लगा दी. ट्रेन के महिला चालक और गार्ड को चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम विजय कुमार साहू ने बुके देर सम्मानित कर उनका हौसला बढाया गया. वही डीआरएम विजय कुमार साहू तथा दक्षिण पूर्व रेलवे महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष अंजूला साहू ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाई गयी और ट्रेन को राउरकेला के लिए रवाना किया गया.

महिला सशक्तिकरण की बहुत बड़ी उपलब्धि
घर के साथ साथ स्वतंत्र रूप से बिना किसी पुरुष के सहयोग से रेल चलाने का जज्बा और उत्साह महिला रेलकर्मियों में साफ तौर पर देखा जा सकता था. महिलाओं के लिए यह अनुभव बिलकुल नया था. क्योंकि अब एक ऐसा वक्त आ गया है जब महिला पुरुषों से एक कदम आगे निकल रही हैं. महिला कर्मियों पर रेल प्रबंधन का विश्वास इतना बढ़ा है कि पूरी ट्रेन की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी जा रही है. महिला रेलकर्मियों ने कहा कि यह महिला सशक्तिकरण के रूप में महिलाओं की बहुत बड़ी उपलब्धि है. महिला रेलकर्मियों ने इस पूरी ट्रेन की कमान संभालने की खास जिम्मेदारी मिलने पर खुशी जाहिर की. कहा कि वे लोग सामान्य रूप से तो काम करती ही हैं, लेकिन जब इस तरह की जिम्मेदारी मिलती है तो उन्हें इससे बहुत प्रोत्साहन मिलता है. लोगों का उनपर जितना विश्वास बढ़ता है उन्हें जिम्मेदारी का भी अहसास होता है. उनकी पूरी कोशिश है कि वे लोग जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतर कर सफलतापूर्वक ट्रेनों का परिचालन करती रहें.

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महिलाओं का हर दिन करें सम्मान
कुछ महिला रेल कर्मियों का यह भी कहना था कि बस एक दिन महिला दिवस पर महिलाओं का सम्मान नहीं होना चाहिए. बल्कि लोगों को हर दिन महिलाओं का सम्मान कर उनके कार्यों का आदर करना चाहिए. महिला रेल कर्मियों ने अपनी पीड़ा प्रकट करते हुए बताया कि अक्सर यात्रियों का उन्हें पूरा सहयोग और समर्थन नहीं मिलता है और न ही लोग उनके कार्यों की सराहना करते हैं, बल्कि इसके उलट उन्हें दुत्कार फटकार मिलती है. जिससे उनका मनोबल टूटता है. इस मौके पर महिलाओं ने कविता पढ़कर भी महिलाओं में जोश भरने का काम किया.

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