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चाईबासा : खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच द्वारा आयोजित जन चर्चा में जनता के सवालों से दूर रहे बड़ालागिया पंचायत के अधिकांश मुखिया प्रत्याशी

Chaibasa : बुधवार को खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम द्वारा सदर प्रखंड के बड़ालागिया पंचायत के मुद्दों और लोगों की मांग पर हाट परिसर में एक सार्वजानिक जन चर्चा का आयोजन किया गया. इसमें सभी मुखिया प्रत्याशियों को जनता के साथ सवाल-जवाब के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन केवल एक प्रत्याशी राई पूर्ति ही आईं. चर्चा में पंचायत के विभिन्न गावों के कई ग्रामीण भाग लिए. बैठक में पंचायत के मुद्दों, पूर्व पंचायत के अनुभव और मुखिया प्रत्याशियों के लिए प्राथमिकता पर विस्तृत रूप से चर्चा हुई.

प्रत्याशियों की अनुपस्थिति पर कबरागुटु के कांडे बोदरा ने कहा कि छः प्रत्याशियों को बुलाने के बावजूद सिर्फ एक ही का उपस्थित होना यह सवाल खड़ा करता है कि चुनाव के बाद ये प्रत्याशी कैसे जनता के हित में काम करेगें. विभिन्न सूत्रों से यह सुनने मिला कि कई प्रत्याशियों को उनके पति या दुसरे लोगों द्वारा चुनावी मैदान में खड़ा किया गया है और उन्हें मुद्दा.आधारित सार्वजानिक चर्चा में भाग लेने से मना किया गया. मंच का मानना है कि प्रत्याशियों का चर्चा में भाग न लेना यह सवाल खड़ा करता है कि आने वाले दिनों में कैसे पंचायत जनता के प्रति जवाबदेह और पारदर्शी बनेगा. साथ ही इस कार्यक्रम के कारण जनता के समक्ष सच्चाई भी स्पष्ट हो गया कि किस प्रत्याशी की क्या सोच है.

बड़ालागिया के लुतू सुंडी ने कहा कि आज हर प्रत्याशी लूटने की मंशा से चुनाव में खड़े हैं. वे गांव-गांव व टोले-टोले जाकर मीट-मछली, दारू, हाड़िया और चावल देकर अपने पक्ष में लुभाने का काम करते हैं. पंचायत की जनता देख चुकी है कि पिछले 5 वर्षो मे क्या चूक हुई है. इस बार ऐसी चूक नहीं होगी. बैठक में जन वितरण प्रणाली, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सार्वजनिक शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था आदि की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई. मंच से जुड़े रमेश जेराई ने विकेंद्रीकरण के संवैधानिक प्रावधानों और पेसा अंतर्गत ग्राम सभा के अधिकारों के विषय में ग्रामीणों को बताया. अधिकांश मुखिया प्रत्याशियों का चर्चा में भाग न लेने के कारण प्रत्याशियों के संग लोगों का सवाल-जवाब तो नहीं हो पाया,

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मंच ने ग्रामीणों के साथ यह चर्चा किया गया कि इस बार ऐसे प्रत्याशी को मुखिया बनाएं जो

The Royal’s
Pushpanjali
Sanjeevani
Pitambara

• अपने चुनाव क्षेत्र में स्थायी रूप से रहते हो
• पारम्परिक स्वशासन व्यवस्था – मुंडा-मानकी व्यवस्था का सम्मान करे व इसमें हस्तक्षेप न करे.
• ग्राम सभा केन्द्रित निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करे। ग्राम सभा के अधिकारों पर हस्तक्षेप न करे. बिना ग्राम सभा की सहमती के, कोई भी योजना का कार्यान्वयन न करे.
• आदिवासी-मूलवासियों के अधिकारों के संघर्ष में साथ दे. जल, जंगल, ज़मीन की लूट का हिस्सा न बने और इसके विरुद्ध संघर्ष में साथ दे.
• मनरेगा मज़दूरों को समय पर काम और भुगतान सुनिश्चित करे, ठेकेदारों का साथ न दें और मनरेगा में भ्रष्टाचार ख़तम करे.
• जन वितरण प्रणाली की कड़ी निगरानी करे ताकि कार्डधारियों को समय पर पूरा राशन मिले.
• सभी बुज़ुर्ग, विधवा और विकलांग व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन सुनिश्चित करे.
• आंगनवाड़ी सेवाओं, विद्यालयों में शिक्षा व मध्याह्न भोजन की कड़ी निगरानी करे.
• सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त करने के लिए संघर्ष करे.
• सामुदायिक व व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टे के संघर्ष में ग्रामीणों का साथ दें.
• मनरेगा व अन्य योजनाओं का इस्तेमाल कर गावों में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए संघर्ष करे.
• पारदर्शिता को बढ़ावा दें एवं पंचायती राज सरकारों द्वारा कार्यान्वित विभिन्न कार्यक्रमों (जैसे मनरेगा, 15वा वित्त आयोग आदि) के खर्च का पूरा ब्यौरा लोगों के समक्ष नियमित रूप से सार्वजानिक करे.
• संवैधानिक मूल्यों, जैसे बराबरी, न्याय, बंधुत्व व धर्मनिर्पेक्षता में विश्वास रखे, सत्य के पक्षधर हो और समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा दे.

इस अनुभव के आधार पर खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम शेष दो चरण के गावों के ग्राम सभा से अपील करता है कि वे भी अपने गाँव में जन चर्चा का आयोजन करें जिसमें सभी प्रत्याशियों को आमंत्रित कर जन मुद्दों पर सवाल-जवाब करें. यह ज़िला में जवाबदेह और पारदर्शी पंचायतों के निर्माण की ओर एक ठोस कदम होगा.

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