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सीएम की अध्यक्षता वाली विकास परिषद के सीईओ अनिल स्वरूप ने सरकार की कार्यशैली और ‘विकास’ पर उठाया सवाल

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Ranchi : झारखंड में हर क्षेत्र में विकास हो रहा है, यह बताने और जताने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. मोमेंटम झारखंड से लेकर ग्राउंड ब्रेकिंग तक में करोड़ों रुपये खर्च कर दिये गये. विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि यह सब दिखावा और घोटाला है, प्रचार के जरिये जमीनी स्थिति को छिपाने का काम हो रहा है. जनता की आंखों में धूल झोंका जा रहा है. अब सरकार के ही महत्वपूर्ण व्यक्ति ने विपक्ष के आरोपों को एक तरह से सही ठहरा दिया है. राज्य विकास परिषद के सीईओ अनिल स्वरूप ने गत एक अगस्त को एक ट्वीट किया है. इसमें उन्होंने साफ सब्दों में कहा, “सिर्फ बड़े लॉंन्चिंग व टार्गेट बनाने से नहीं होता है, जब तक एक्शन प्लान तैयार न हो. सपना देखना अच्छी बात है और सभी को देखना चाहिए, पर हमारे पैर हमेशा जमीन पर रहने चाहिए.” विकास परिषद के सीईओ के इस बयान को लोग झारखंड सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि, उन्होंने अपने ट्वीट में झारखंड का नाम नहीं लिया है.

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सब कुछ ठीक नहीं चल रहा राज्य विकास परिषद में

इतना ही नहीं, राज्य विकास परिषद की टीम और टीम के सीईओ अनिल स्वरूप के बीच सामंजस्य की कमी की बात सामने आ रही है. हालांकि, इस विषय पर विकास परिषद से जुड़ा कोई भी अधिकारी या कर्मी कुछ भी बोलने से कतरा रहा है, लेकिन नाम न छापने की शर्त पर जो बात लोगों ने बतायी, उससे साफ है कि झारखंड राज्य विकास परिषद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इन सबके बीच गौर करनेवाली बात है कि परिषद के एक सदस्य को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि वह इसके सदस्य भी हैं.

सीईओ के ट्वीट के मायने

अनिल स्वरूप सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं. अमूमन हर मामले में वह ट्वीट जरूर करते हैं. एक अगस्त को भी उन्होंने एक ट्वीट किया. ट्वीट में उन्होंने लिखा-

“Impressive targets & grand launches have no meaning without workable action plan, clearly outlining how would they be achieved, who would do what & by when. These are counter productive. It is nice to dream & each one of us should, but we should have our feet firmly on the ground.”

इस ट्वीट को लेकर सरकार और विभागों में काफी चर्चा है. लोगों का कहना है कि अनिल स्वरूप ने यह ट्वीट झारखंड सरकार को ध्यान में रखकर लिखा है. उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिये हैं कि सिर्फ ख्याली पुलाव पकाने से नहीं होगा, बल्कि योजनाओं को जमीनी हकीकत देनेवाली योजना तैयार करनी होगी.

 

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उसी दिन अनिल स्वरूप ने दूसरा ट्वीट किया

There should be a 3rd party assessment about the impact of World Bank’s assessment of ease of doing business. Has it really helped? Can it be of help if it was limited to a few cities? If World Bank is being engaged to improve ease of doing business, there is conflict of interest.

इस ट्वीट में उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बारे लिखा है. उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए एक थर्ड पार्टी की एसेसमेंट का जिक्र किया है. बता दें कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर झारखंड बराबर खबरों में रह रहा है.

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दो अगस्त को अनिल स्वरूप ने एक ट्वीट किया. ट्वीट के जरिये ही उन्होंने वोटिंग करायी, जिसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर थर्ड पार्टी एसेसमेंट की बात थी.

As one arm of World Bank is assisting in improving “ease of doing business”, should some other arm of the Bank determine whether doing business has become easy or should it be determined by 3rd party seeking response of the industry?

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सीईओ को कार्यसंस्कृति बदलने में हो रही है परेशानी

परिषद के गठन के बाद तीन साल के विकास का खाका तैयार किया गया. इसके बाद रिटार्यड आईएएस अनिल स्वरूप को परिषद का सीईओ बनाया गया. अनिल स्वरूप केंद्र में तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे हैं. उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है. जिस तरह के वर्क कल्चर में उन्होंने दिल्ली में काम किया है, उसी कल्चर से यहां भी काम करना चाह रहे हैं. लेकिन, राज्य सरकार के कर्मी और अधिकारी उनके वर्क कल्चर को अपना नहीं पा रहे हैं. इस वजह से परिषद में काम करने में सीईओ और दूसरे सरकारी अधिकारी और कर्मी को परेशानी हो रही है.

सदस्य को सदस्यता की जानकारी ही नहीं

विकास परिषद राज्य के लिए कितना कारगर है, उसका पता इस बात से चलता है कि पद्मश्री अशोक भगत को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि वह इस परिषद के सदस्य भी हैं. उन्होंने न्यूज विंग संवाददाता को बताया, “मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि मैं इस परिषद का सदस्य भी हूं.” बता दें कि परिषद के अध्यक्ष सीएम रघुवर दास हैं, उपाध्यक्ष सुदेश महतो और सुरजीत सिंह भल्ला हैं. सीईओ अनिल स्वरूप, सदस्य पद्मश्री अशोक भगत, टी नंदकुमार. पदेन सदस्य सभी विभाग के अपर सचिव. चक्रानुक्रम में एक साल के लिए विधायकों की कुल संख्या के 1/5 विधायक सदस्य रहते हैं. वहीं, नगर निकाय और पंचायती राज से पांच-पांच सदस्य क्रम के अनुसार रहते हैं. इसके अलावा राज्य के सभी सांसद और राज्य सरकार के मंत्री सदस्य होते हैं.

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उपाध्यक्ष सुदेश महतो कभी कार्यालय तक नहीं आये

राज्य विकास परिषद का अध्यक्ष मुख्यमंत्री रघुवर दास को बनाया गया. वहीं, दो उपाध्यक्ष भी बनाये गये. आजसू प्रमुख सुदेश महतो और अर्थशास्त्री सुरजीत सिंह भल्ला. लेकिन, उपाध्यक्ष बनाये जाने के बाद से अब तक सुदेश महतो ने राज्य विकास परिषद की एक भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया. न ही कभी कार्यालय आये. वह किसी भी तरीके से परिषद से जुड़े नहीं रहे. दोनों उपाध्यक्षों को दो साल के लिए नियुक्त किया गया था. परिषद का गठन हुए दो साल से ज्यादा हो गये, लेकिन सरकार की तरफ से नये उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई. विभाग का कहना है कि सीएम ऑफिस में उपाध्यक्षों की कार्यावधि के विस्तार के लिए फाइल पड़ी हुई है. जल्द ही बैठक कर सदस्यों के नाम पर विचार किया जायेगा.

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