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जल्द सुलझेगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी भूमि विवाद, प्रशासन फिर से विभाग को भेजेगा प्राक्कलित राशि का प्रस्ताव

Ranchi: सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पहुंच पथ के लिये जमीन का मामला जल्द सुलझ जायेगा. इसको लेकर जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई तेज कर दी गयी है. जिला भू-अर्जन शाखा की टीम तीन दिन पहले यूनिवर्सिटी जाकर पूरी जमीन का जायजा लिया. जिस पहुंच पथ को लेकर विवाद चल रहा था उसे भी देखा. क्योंकि उसी के आधार पर जमीन का मुल्यांकन किया जायेगा. अब प्रशासन पहुंच पथ जमीन के लिये नये सिरे से प्राकल्लित राशि शिक्षा विभाग को भेजेगा. प्रशासन इसे तैयार कर रहा है. पूर्व में 139 एकड़ की प्राकल्लित राशि भेजी गयी थी, जो घटकर 15.82 हो गयी है.

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क्या था विवाद ?

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केंद्रीय विवि के लिये सरकार ने जमीन अधिग्रहण किया और विवि शुरू भी हो गया लेकिन वहां के कई रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया. जिसको लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया. जिसके बाद वहां विवि तक जाने वाला पहुंच पथ का मामला फंस गया.

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विधानसभा में भी उठा था मामला

केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण का मामला भाजपा विधायक समरीलाल ने 23 मार्च 2021 को विधानसभा में उठाय़ा था. विपक्ष के विधायकों ने सवाल उठाते हुए कहा था कि जमीन अधिग्रहण हो गया है. लेकिन, रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है.विधानसभा में विधायक समरी लाल ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर राज्य सरकार की ओर से चेरी मनातू में लगभग 501 एकड़ जमीन आवंटित की है. इस जमीन को सरकार ने अधिग्रहण किया है. लेकिन, जमीन के रैयतों को मुआवजा नही मिला है. उन्होंने यह भी कहा कि चारों तरफ बाउंड्री का काम किया जा रहा है, जिससे लोगों की खेती-किसानी खत्म हो गई हैं.

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प्रशासन की टीम यूनिवर्सिटी के कुल सचिव से मुलाकात कर ली जानकारी

बताया गया कि जिला प्रशासन की टीम यूनिवर्सिटी के कुलसचिव से मुलाकात कर जमीन के बारे में विस्तृत जानकारी ली. वहीं,जमीन के स्थिति के बारे में अधिकारियों ने उन्हें बताया.

कुल 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है

इस योजना के लिये 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था. इनमें 209 एकड़ रैयती जमीन है और शेष 361 एकड़ जमीन गैरमजरुआ है. बताया जाता है कि जिला भू-अर्जन कार्यालय ने पहुंच पथ के लिये 40 करोड़ की मांग विभाग से की है.

तीन गांव की जमीन ली गयी है

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिये तीन गांव की जमीन ली गयी है. जिन तीन गांव की जमीन है उनमें चेड़ी, मनातू व सुकूरहुट्टू के गांव शामिल है. मनातू में 79.31 एकड़, चेड़ी में 56.74 एकड़ और सुकुरहुट्टू में 3.12 एकड़ जमीन ली गयी है.

वर्ष 2009 में की गयी थी स्थापना

एक मार्च 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रभा पाटिल की अनुमति के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड की स्थापना की गई थी. वर्तमान में केंद्रीय विवि राजधानी रांची के ब्रांबे में संचालित किया जा रहा है.

 

 

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