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#Jharkhand में प्राचीन सांस्कृतिक नृत्यों को संरक्षित कर रही केंद्र सरकार

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Ranchi: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया है कि झारखंड के प्राचीन लोक संस्कृति का हिस्सा रहे नृत्य कलाओं के संरक्षण पर वह गंभीर है.

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल के अनुसार झारखंड सहित पूरे देश में प्राचीन लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए केन्द्र सजग है.

सरकार ने पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में मुख्यालय के साथ साथ सात जोनल सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किये हैं. झारखंड पूर्वी आंचलिक सांस्कृतिक केंद्र का सदस्य है.

कोलकाता और गुजरात पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर का सदस्य राज्य है. नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गतिविधियों के अलावा ये आंचलिक सांस्कृतिक केंद्र कई योजनाओं को भी कार्यान्वित करते हैं.

इसके अलावे प्राचीन लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए युवा प्रतिभाशाली कलाकारों, गुरु शिष्य परम्परा, रंगमंच कायाकल्प, अनुसंधान और प्रलेखन, शिल्पग्राम, अष्टक और राष्ट्रीय सांस्कृतिक का आदान-प्रदान करतें हैं.

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झारखंड में संस्कृति व लोकनृत्य के संरक्षण पर है जोर

रांची के सांसद संजय सेठ ने सदन में झारखण्ड में संस्कृति व लोकनृत्य के संरक्षण को लेकर सवाल पूछे थे.

जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लोक कला के विभिन्न रूपों के संरक्षण, संवर्धन और संरक्षण के लिए इन्हें पुरस्कृत करने का भी कार्य केंद्र की ओर से किया जाता है.

झारखंड में संरक्षित की जा रही प्राचीन लोक संस्कृतियों में सिंघुआ नृत्य (खुंटी), राता नृत्य (पूर्वी सिंहभूम, दुमका), रिंझा नृत्य (पूर्वी सिंहभूम, दुमका), कीहो नृत्य (सिमडेगा), बिरहोर नृत्य (पूर्वी सिंहभूम, गुमला), डाटा नृत्य (पूर्वी सिंहभूम, गुमला), कोरवा (सिमडेगा), फागुवा (रांची, गुमला) और तुरी (रांची, खारवारी) हैं.

मंत्री के अनुसार देश के सभी सात आंचलिक सांस्कृतिक केंद्र को उनके ऊद्देश्य की आपूर्ति लिए सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा वार्षिक अनुदान दिया जाता है. किसी भी राज्य को कला-वार धन आवंटित नहीं किया जाता है.

संस्कृति मंत्रालय द्वारा आवंटित धन के अलावा, EZCC और WZCC को कॉर्पस फंड (30.75 करोड़ और 30.00 करोड़ रुपये) उपलब्ध है.

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