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झारखंड के ST आबादी वाले 3891 गांवों की PMAAGY के जरिये सूरत बदल रही केंद्र सरकार

Ranchi : जनजातीय मंत्रालय (केंद्र सरकार) झारखंड में जनजातीय बहुल गांवों की सूरत बदलने में लगा है. इसके लिये केंद्र के स्तर से यहां के 3891 गांवों को चुना गया है. ये ऐसे गांव हैं जिनमें स्थानीय आबादी का कम से कम 50 फीसदी एसटी वर्ग है. सोमवार को चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना (PMAAGY) के ब्यौरा, उद्देश्य, लक्ष्य के साथ इससे जुड़े बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी. इस पर जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने जानकारी दी कि केन्द्र सरकार आदिवासी समाज के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए कई कल्याणकारी येाजनाएं चला रही है.

मंत्रालय का बजट 2020-21 में 5494 करोड़ रुपए से 53 फीसद से बढाकर इस वित्तीय वर्ष में 8451.92 करोड़ किया गया है. ST आबादी वाले देशभर के 36428 गांवों को प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना में शामिल किया गया है. इसमें झारखण्ड के 3891 गांव भी शामिल हैं.

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गांवों के उत्थान के लिये मिल रहे पैसे

जनजातीय मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना में शामिल गांवों को प्रति गांव 20 लाख 38 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है. सुनील सिंह को बताया गया कि चतरा संसदीय क्षेत्र के कई जिले चतरा, लातेहार एवं पलामू के भी कई गांवों को प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना में शामिल कर उसका लाभ दिया जा रहा है. इस लिस्ट में 256 गांव शामिल किये गये हैं.

सुनील कुमार सिंह ने केंद्र के जवाब पर खुशी जाहिर करते हुए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया. कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र उत्थान के लिये कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. साथ ही उन्होंने झारखण्ड सहित त्रिपुरा, यूपी आदि राज्यों में कुछ जातियों को ST में शामिल होने के बाद उन गांवों को भी प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना का लाभ दिये जाने पर बात रखी.

उन्होंने कहा कि ऐसे में अब स्वाभाविक रूप से कई गांवों व प्रखण्डों में स्थानीय आबादी 50% अनुसूचित जनजातियों की हो गयी होगी. ऐसे गांवों की पहचान कर PMAAGY में शामिल करने की योजना पर भी काम हो.

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प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना की खूबी

गौरतलब है कि इस योजना के तहत चयनित गांवों में विकास के 8 प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाता है. इनमें सड़क संपर्क (आंतरिक और अंतर गांव, ब्लॉक), दूरसंचार संपर्क (मोबाइल, इंटरनेट), स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य उप-केंद्र, पेयजल सुविधा, जल निकासी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में अंतर को कम करने की परिकल्पना की गयी है.

फिलहाल चयनित गांवों के लिये 20.38 लाख रुपये (प्रति गांव) की राशि का प्रावधान किया गया है. अगले 5 सालों में योजना के लिये कैबिनेट द्वारा 7276 करोड़ रुपये की राशि की मंजूरी दी गयी है.

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