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केंद्र के Electricity Amendment Bill से झारखंड में बिजली निगम के निजीकरण का खतरा, विरोध, 10 अगस्त को हड़ताल और ब्लैकआउट

Ranchi : झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के कर्मियों ने केंद्र के नये बिजली कानून के खिलाफ सोमवार को विरोध कार्यक्रम चलाया. केन्द्रीय संगठन National Coordisation Cornmittee of Electricity Employee and Engineers (NCCDEES) के आह्वाह्न पर यह कार्यक्रम हुआ. निगम के कई कर्मचारियों, पदाधिकारियों ने इसमें भागीदारी की. जेपेसा (झारखंड डिप्लोमा अभियंता संघ) के महासचिव प्रीतम निशि किड़ो ने कहा कि केंद्र के प्रस्तावित Electricity Amendment Bill 2020 से बिजली निगम के निजीकरण का खतरा बढ़ेगा.

इस बिल से उद्योगपतियों को फायदा होगा जबकि आम जनों को घाटा. ऐसे में अगर केंद्र ने इस बिल को वापस नहीं लिया तो पूरे देश में 10 अगस्त को केंद्रीय संगठन के आह्वाह्न पर हड़ताल किया जायेगा. ब्लैकआउट भी होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार पर होगी.

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स्टैंड पर दोहरी चाल

जेपेसा के महामंत्री पीके जायसवाल ने कहा कि वर्तमान सरकार इस बिल का विरोध कर रही है. दूसरी तरफ निजीकरण के लिए कंसल्टेंट बहाल कर रही है. इससे सरकार के स्टैंड का पता नहीं चल रहा है. शहरी क्षेत्रों में जहां से अधिक राजस्व आता है, उसे निजी क्षेत्रों को दे देगी और ग्रामीण क्षेत्रों से जहां कम रेवेन्यू प्राप्त होता है, उसे रखेगी जो हास्यास्पद है.

झारखंड पावर वर्कर्स यूनियन के महामंत्री वरुण सिंह ने सभी संगठनों से एक होकर लड़ाई लड़ने की अपील की. कहा कि अभी का धरना, विरोध कार्यक्रम एक चेतावनी है. अगर केंद्र ने बात नहीं मानी तो आगे बिजली विभाग के सभी कर्मी, पदाधिकारी और इंजीनियर हड़ताल पर चले जायेंगे.

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निगम प्रबंधन से की गयी ये मांग

मौके पर अभियंता पदाधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति संयुक्त मोर्चा की ओऱ से निगम प्रबंधन से कई मांग भी की गयी. आग्रह किया गया कि लंबित मुद्दों को अविलंब लागू किया जाये. इनमें 6 प्रतिशत ऊर्जा भत्ता को लागू किया जाना, सभी रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ करना, पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करना और प्रोन्नति पर लगी रोक को वापस लिया जाना शामिल है.

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