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केन्द्र सरकार सोशल मीडिया की निगरानी वाला अध्यादेश वापस लेगी

सुप्रीम कोर्ट के कड़े तेवर के बाद केन्द्र सरकार ने अपने कदम वापस खींचे

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New Delhi: केन्द्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए मीडिया हब बनाने की बात कही थी. मीडिया हब सोशल साइट्स पर नजर रखने के लिए थी. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार के इस कदम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार क्या देश को ‘निगरानी राष्ट्र’ बनाना चाहती है. इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मीडिया हब बनाने वाला अध्यादेश सरकार वापस लेगी.

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आपकी निजी जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश में थी सरकार!

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सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार की मंशा पर सवा उठाए थे. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि सरकार किसी के वाट्सएप मैसेज को क्यों टेप करना चाहती है ? सरकार देश के हर नागरिक पर निगरानी क्यों रखना चाहती है ? इसके बाद केन्द्र सरकार ने अपने कदम वापस खींचने की बात कही है.

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टीएससी सांसद महुआ मोइत्रा ने दायर की थी याचिका

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने याचिका दायर करते हुए कहा था कि सरकार के इस अध्यादेश से जनता में ये संदेश गया है कि सरकार उनकी जासूसी करना चाहती है. तब महुआ मोइत्रा ने कहा था कि मीडिया हब के अस्तित्व में आते ही सरकार की पहुंच लोगों के फेसबुक, ट्विटर और वाट्सएप तक हो जाएगी. ये निजता के अधिकार का उल्लंघन है.

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बेसिल (BECIL) ने जारी किया था मीडियाकर्मियों की नियुक्ति के लिए टेंडर

मीडिया हब के लिए जनवरी में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंससल्टेंट इंडिया लिमिटेड (BECIL) ने टेंडर जारी किया था. टेंडर में प्राइवेट कंपनियों से एक प्लेटफॉर्म तैयार करने को कहा गया था. इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोशल मीडिया, ब्लॉग्स और न्यूज पर नजर रखी जानी थी और उसे डाटा सेंटर को भेजा जाना था. बेसिल (BECIL) ने कहा था कि इस प्रोजेक्ट के लिए संविदा के आधार पर मीडियाकर्मियों की नियुक्ति की जाएगी जो डाटा पर नजर रखेंगे.

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