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केंद्र अपना रुख बदले, नहीं तो बंद किये जायेंगे झारखंड से केंद्र को मिलने वाले संसाधन- जेएमएम

पार्टी प्रवक्ता ने कहा-  कोरोना संक्रमण में भगवान भरोसे जनता को छोड़ने का काम किया भाजपा ने

Ranchi  :  कोरोना संक्रमण के दौर में केंद्र का राज्य के साथ असहयोगत्मक रवैये से नाराज सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है. पार्टी महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडे ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में केंद्र को चाहिए था कि जीएसटी क्षतिपूर्ति, कोल कंपनियों के ऊपर या केंद्र सरकार के उपक्रम पर राज्य के बकाया हिस्से का भुगतान करे.

लेकिन ऐसा न कर केंद्र ने एक साजिश के तहत आरबीआइ को निर्देश देकर डीवीसी बकाये के रूप में करोड़ो रुपये काट लिये. उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में केंद्र का यह रवैया साफ बताता है कि राज्य की जनता को भगवान भरोसे छोड़ने का काम भाजपा नेताओं ने किया. पार्टी की मंशा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अगर केंद्र अपने रुख को नहीं बदलता है, तो जो भी संसाधन राज्य केंद्र को देता है, उसे बंद करने का काम झारखंड मुक्ति मोर्चा करेगा.

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अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड की रिकवरी रेट बेहतर

विनोद पांडेय ने कहा कि सत्ता में आते ही जेएमएम और उसके सहयोगी पार्टियों ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र को धरातल पर उतारने का काम शुरू किया. लेकिन कोरोना संक्रमण को देख पूरे राज्य में बीते 22 मार्च को लॉकडाउन लगाया गया. इसी समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राज्य चिंता न करें, जल्द ही इस कोरोना महामारी पर काबू पा लिया जाएगा.

लेकिन बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच केंद्र ने राज्य पर दबाव  डालने का काम शुरू किया. ऐसा नहीं है कि हेमंत सरकार इसमें पीछे रही. खराब वित्तीय हालत के बावजूद राज्य सरकार ने जनता के सहयोग से इस महामारी पर काबू पा लिया. आज की स्थिति यह है कि अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड की कोरोना से रिकवरी रेट काफी बेहतर है. संक्रमित व्यक्तियों की संख्या काफी घटी है.

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जरूरत पड़ी तो लड़कर राज्य के अधिकारों को लेगा जेएमएम

जेएमएम प्रवक्ता ने कहा कि हेमंत सरकार ने हर तरह से केंद्र से अपनी हिस्से के करोड़ों रुपये लेने की कोशिश की. लेकिन केंद्र का सहयोग केवल नकारात्मक ही रहा. ऊपर से राज्य को परेशान करने की नीयत से डीवीसी के बकाया पैसे को जबरन सरकार के खाते से निकाल लिया.

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में केंद्र को यह बता दिया कि केंद्र के इस नीति को झारखंड कभी बर्दाशत नही करेगा. जरूरत पड़ेगी तो केंद्र से लड़ाई लड़कर हम अपने अधिकारों को वापस लेंगे.

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