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जीएसटी के 2500 करोड़ के साथ 50,000 एकड़ भूमि के एवज में 45,000 करोड़ का भुगतान करे केंद्र : डॉ उरांव

♦वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिया हिस्सा

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♦केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बुलायी गयी थी बैठक

Ranchi :  झारखंड के वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने केंद्र सरकार से राज्य के बकाये 2500 करोड़ जीएसटी के साथ 50,000 एकड़ भूमि के एवज में 45,000 करोड़ रुपये भुगतान की मांग की है. 50,000 एकड़ भूमि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को दी गयी है. वित्त मंत्री गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में भाग ले रहे थे.

उन्होंने कहा कि 47,500 करोड़ रुपये की बकाये इस राशि का केंद्र चरणबद्ध तरीके से भुगतान करे. निर्मला सीतारमण ने राज्य सरकारों को कहा कि चिंता न करें. राज्य सरकारें खर्च करें. केंद्र सरकार आरबीआइ से ऋण लेकर राज्यों को राशि उपलब्ध करायेगी. इसका बोझ राज्य सरकार पर नहीं पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार 14 प्रतिशत जीएसटी क्षतिपूर्ति का भुगतान भी राज्यों को उपलब्ध करायेगी.

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कोरोना काल में झारखंड की स्थिति अच्छी नहीं

डॉ. उरांव ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि झारखंड छोटा और गरीब राज्य है. केंद्र सरकार को जीएसटी कंपेनशेसन के रूप में करीब 2500 करोड़ रुपये का भुगतान झारखंड को करना है. उन्होंने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना काल में झारखंड की स्थिति अच्छी नहीं है. जीएसटी काउंसिल को बकाया भुगतान को लेकर अपनी वचनबद्धता निभानी चाहिए. 14 प्रतिशत ग्रोथ के हिसाब से अनिवार्य रूप से केन्द्र को राज्यों को देना है जो कानूनी बाध्यता भी है. उन्होंने बताया कि जीएसटी कलेक्शन का केंद्र सरकार 75 प्रतिशत पहले ही ले चुकी है. राज्यों के पास राजस्व संग्रहण का कुछ भी स्रोत नहीं है. झारखंड को भी कलेक्शन में हिस्सा प्रत्येक महीने मिलना चाहिए.

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आरबीआइ से ऋण लेकर राशि उपलब्ध करायेगी, इसका बोझ भी राज्यों पर नहीं पड़ेगा : सीतारण

इस दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार के राजस्व संग्रहण में कमी आयी है, ऐसे में वैकल्पिक उपाय बतायें. इस पर वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि सरकार दो तरह से ही संसाधन में बढ़ोत्तरी कर सकती है. पहला तो टैक्स लगा कर, जो अभी कोरोना संक्रमणकाल में मुश्किल है. वहीं दूसरा कर्ज लेकर. ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार आरबीआइ से कर्ज लेकर राज्य सरकार को राशि उपलब्ध कराये. साथ ही केंद्र सरकार ही इस ऋण की अदायगी करे और इसका बोझ राज्य सरकार पर नहीं पड़ना चाहिए. केंद्रीय वित्त मंत्री ने भी इस पर सहमति जतायी है.

राज्य में जमीन का 45000 करोड़ रुपये बकाया

वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए झारखंड सरकार की ओर से 50 हजार एकड़ जमीन उपलब्ध करायी गयी है. जहां खनन कार्य भी निरंतर हो रहा है, इसके एवज में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का बकाया है. कुछ दिन पहले केंद्रीय कोयला मंत्री झारखंड आये थे और इसके एवज में 250 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. केंद्र सरकार जमीन के एवज में बकाया करीब 45 हजार करोड़ रुपये को चरणबद्ध तरीके से झारखंड को उपलब्ध कराने में मदद करे.

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