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टीबी निवारण में पहला स्थान मिलते ही केंद्र ने रोका राज्य का फंड, अब तक नहीं मिली 60 % राशि

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नीति आयोग ने इस साल टीबी निवारण में राज्य को पहला स्थान दिया.

राज्य टीबी सेल को राज्य सरकार 40 प्रतिशत और केंद्र सरकार 60 प्रतिशत फंड देती है.

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जनजातियों जिलों के 16012 मरीजों को बैंक खाता के बावजूद नहीं मिली सहयोग राशि.

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Ranchi: टीबी माइक्रोबैक्टीरियम ट्युबरक्लोसिस के मरीजों के इलाज के लिये केंद्र और राज्य सरकार की ओर से फंडिग की जाती है.

इसमें राज्य सरकार 40 प्रतिशत और केंद्र सरकार 60 प्रतिशत की राशि देती है. लेकिन पिछले दो सालों से केंद्र और राज्य की ओर से मिले वाले फंड में कमी आयी है.

साल 2019-20 के बजटीय प्रावधान का जिक्र करें तो इस साल के लिये राज्य सरकार की ओर से 28 करोड़ रूपये राज्य टीबी सेल को दिये गये. जबकि राज्य सरकार की ओर से जो राशि आवंटित की गयी है, वो 27 मदों में बांटी जाती है.

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इसमें केंद्र सरकार की ओर से अब तक फंड रिलीज नहीं किया गया. इन मदों में 14 जनजातिय जिलों के मरीजों के सहयोग राशि के लिये, सहिया बहनों को मरीजों के ठीक होने पर प्रोत्साहन राशि के लिये, निक्षय पोषण योजना के नोटिफिकेशन, केमिस्ट, ड्रग्स्टि समेत अन्य मदों के लिये है. फंड की कमी के कारण इन मदों में भी कटौती की जा रही है.

केंद्र की ओर से इस वित्तीय वर्ष फंड रिलीज नहीं हुआ

केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाला मद अभी तब राज्य टीबी सेल को नहीं मिला है.

अधिकारियों ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार राज्य नेशनल हेल्थ मिशन को राशि आवंटित करती है, जो टीबी सेल को केंद्रीय फंड रिलीज करती है.

लेकिन इस बार नेशनल हेल्थ मिशन की ओर से अब तक राशि नहीं दी गयी है. जबकि वित्तिय वर्ष पूरा होते ही राज्य टीबी सेल की ओर से प्रस्ताव भेज दिया गया था. अधिकारियों से जानकारी हुई कि फंड की कमी के कारण मरीजों को उचित सुविधाएं नहीं मिल पाती.

बता दें कि दो सप्ताह पहले नीति आयोग की रिपोर्ट ने टीबी निवारण में राज्य को पहला स्थान दिया. साल 2018-19 में केंद्र और राज्य फंडिंग मिला के 37 करोड़ मिले थे.

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बजटीय प्रावधान कम और ऑडिटिंग भी नहीं

2019-20 में जनजातिय जिलों के मरीजों को मिलने वाले सहयोग राशि के लिये एक करोड़ 80 लाख का प्रावधान है. साल 2018-19 में इस मद के लिये एक करोड़ 88 लाख का प्रावधान था.

लेकिन पिछले वित्तिय वर्ष की ऑडिटिंग नहीं होने के कारण राज्य टीबी सेल के पास यह जानकारी नहीं है कि कितनी राशि इन मदों में खर्च की गयी और कितने शेष है.

अधिकारियों से जानकारी मिली की ऑडिटिंग अप्रैल माह में ही हो जानी थी. लेकिन प्रक्रिया अभी भी चल रही है. जिससे जानकारी नहीं है कि कितनी राशि अब तक खर्च हुई.

इसी तरह सहिया बहनों के लिये तीन करोड़ 98 लाख, निक्षय पोषण योजना के तहत नोटिफिकेशन, केमिस्ट, ड्रग्स्टि के लिये दो करोड़ 50 लाख और पोषाहार सहयोग के लिये 18 करोड़ 80 लाख का प्रावधान है.

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इसी तरह अन्य मदों पर भी राशि आवंटित की गयी. अधिकारियों ने बताया कि काफी सीमित फंड मिलता है, अलग-अलग मदों में फंड जिलावार आवंटित कर दिया जाता है.

16012 मरीजों के पास बैंक खाता होने के बाद भी सहयोग राशि नहीं मिली

राज्य के जनजातिय जिलों में रहने वाले मरीजों को इलाज के लिये 750 रूपये सहयोग राशि दी जाती है. साल 2017 के पहले यह राशि इलाज के बाद दी जाती थी, लेकिन 2017 से ये राशि मरीज में टीबी पाये जाने के बाद से ही मिल रही है.

2017 से 2019 तक 14 जनजातिय जिलों में 23,539 मरीज टीबी के मिलें, इसमें से 16012 मरीजों के पास बैंक खाता था.
लेकिन बैंक खाता धारकों में से मात्र 8165 मरीजों को ही सहयोग राशि मिल पायी.

टीबी सेल के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई मरीज बैंक खाता हीं सही नहीं देते, जनजातिय इलाका होने के कारण जागरूकता कम है. वहीं बजटीय प्रावधान कम है. जनजातिय जिलों के लिये जो राशि आवंटित की जाती है. इसी से सहयोग राशि और निक्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह मिलने वाला 500 रूपये भी देना है. जो काफी मुश्किल है. राज्य के 24 जिलों में से 14 जनजातिय जिले हैं.

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