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केंद्र सरकार ने टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू,टेलीग्राफ,आनंद बाजार पत्रिका में सरकारी विज्ञापन पर लगायी रोक

New Delhi: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू जैसे कुछ अखबारों के सरकारी विज्ञापन बंद करने पर सवाल उठाये हैं.

बुधवार को लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार पर अलोकतांत्रिक ढंग से प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाकर मुद्दा उठाया था.

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सरकार के खिलाफ लिखने की सजा!

अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में मसले को उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ लिखने के कारण ही टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दू, टेलीग्राफ और आनंद बाजार पत्रिका जैसे अखबारों के सरकारी विज्ञापन पर रोक लगायी गयी है. उन्होंने इसे मीडिया की आवाज, उसकी स्वतंत्रता को छीनने वाला कदम बताया.

उन्होंने आरोप लगाया कि राफेल डील में हुए भ्रष्टाचार और चुनाव के दौरान पीएम द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन का मामला अपने अखबारों में उठाने के कारण इन अखबारों में विज्ञापन बंद किये गये हैं.

नहीं मिल रहे सरकारी विज्ञापन

सरकार के सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया, टेलीग्राफ, आनंद बाजार पत्रिका इन अखबारों को आम चुनाव के दिनों से ही सरकारी विज्ञापन नहीं मिल रहे. हालांकि, ये बैन एक तरह से अघोषित है. यह प्रतिबंध टाइम्स नाव और मिरर नाव पर भी लागू है.

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केंद्र सरकार की विज्ञापन जारी करने वाली नोडल एजेंसी, ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन (BOC) जो पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय के विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के नाम से जानी जाती थी.

उल्लेखनीय है कि बीओसी ने 29 मई 2019 को अधिसूचना में यह साफ लिखा था कि किसी भी ऐसे मीडिया हाउस को विज्ञापन नहीं सौपें जाएंगे जो सामाजिक सद्भावना के खिलाफ खबरे छापते हैं.

अगर आंकड़ों में बात करें तो Pgurus के अनुसार, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप को केंद्र सरकार के विज्ञापनों से औसतन 15 करोड़ रुपये/महीने से अधिक मिलता है और ऐसे ही औसतन हिंदू को लगभग 4 करोड़ प्रतिमाह मिलता है.

सरकारी सूत्रों की मानें तो, द टेलीग्राफ और टाइम्स ऑफ इंडिया पर ये अघोषित बैन कितने समय तक जारी रहेगा, ये तो पता नहीं. लेकिन द हिन्दू पर ये बैन फिलहाल जारी रखने की खबर है.

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